Abhilekhpal ya Record Keeper ke kartavya 3

 

अभिलेखापाल या रिकार्ड कीपर के कर्तव्य 3
Abhilekhpal ya Record Keeper ke kartavya 3
अभिलेखों का निरीक्षण

रिकार्ड कीपर का ध्यान नियम 356 से 368 की ओर आकर्षित किया जाता है जिसमें अभिलेखों के निरीक्षण के बारे में आवश्यक प्रावधान है। इसके लिए रिकार्ड रूम में निराकृत अभिलेख का निरीक्षण करवाया जाता है जिसके लिए नियम 359 के अनुसार निरीक्षण पुस्तिका रखी जाती है निरीक्षण के समय केवल पेन्सिल का उपयोग होना चाहिए स्याही या बाॅल पेन का उपयोग नहीं किया जा सकता है जैसा कि नियम 364 में प्रावधान है।

मूल अभिलेख में कोई निशान नहीं लगाया जा सकता है। निरीक्षण रिकार्ड कीपर को अपनी देख-रेख में करवाना चाहिए नियमानुसार निरीक्षण शुल्क नियम 360 एवं 362 के अनुसार वसुला जाना चाहिए। निरीक्षण की पंजी रखना ओर नियमानुसार निरीक्षण करवाना यह प्रथाये समाप्त सी हो गई है इन्हें फिर से प्रारंभ करवाया जाना चाहिए और अनाधिकृत रूप से किसी भी पक्षकार या अभिभाषक को अभिलेख का निरीक्षण नहीं करवाना चाहिए। लोक अभियोजक की ओर से उसका अधिकृत लिपिक निरीक्षण कर सकता है जैसा कि नियम 363 की टिप्पणी से स्पष्ट है। सिविल रीडर/ क्रिमनल रीडर/ निष्पादक लिपिक भी अभिलेखों के निरीक्षण के इन नियमों को ध्यान में रखे।

दाण्डिक या फौजदारी के मामले में

रिकार्ड कीपर का ध्यान म0 प्र0 नियम एवं आदेश आपराधिक के नियम 476 से 544 जिन्हे आगे फौजदारी नियम कहा जायेगा की ओर दिलवाया जाता है जिनमें अभिलेखों और अन्य प्रपत्रों का अभिलेखागार में भेजा जाना उनका विनिष्टिकरण और निरीक्षण के बारे मे आवश्यक प्रावधान है और दाण्डिक मामलों के रिकार्ड की अभिरक्षा के बारे में इन नियमों का कडाई से पालन किया जाना चाहिए। कुछ प्रमुख नियम और निर्देश निम्नानुसार हैः-

  1. सभी प्रकार के निराकृत आपराधिक प्रकरणों का अभिलेख अभिलेखागार या रिकार्ड रूम में जमा होता है। रिकार्ड कीपर का यह कर्तव्य है कि वह सूचियों से मिलान कर के प्रकरणों को विधिवत जांच करके रिकार्ड रूम में जमा करें।
  2. कार्यवाहियां सामान्यतः तीन भागों में विभक्त की जाती है प्रथम, प्रारंभिक मामले, द्वितीय, विविध न्यायिक कार्यवाहिंया या एम जे सी और तृतीय, विविध न्यायिकेत्तर कार्यवाहियां या मिसलेनियस नाॅन-ज्यूडिशियल प्रोसेडिंग। एम जे सी की सूची नियम 575 फौजदारी में दी गई है अतः उस सूची में से संबंधित प्रकरण विविध न्यायिक कार्यवाही के भाग मे आते है। विविध न्यायिकेत्तर कार्यवाही का उल्लेख नियम 482 फौजदारी के उपनियम 1 में किया गया है अतः वे प्रकरण इस भाग में आते है जबकि प्रारंभिक मामले में सभी मूल फौजदारी प्रकरण आते है इस संबंध में नियम 477 फौजदारी को ध्यान में रखा जावे जिसमें उक्त विभाजन बतलाया गया है।
  3. ऐसे दस्तावेज जो जाली हो या जिनके जाली होने का संदेह हो तथा ऐसे दस्तावेज जिन्हें विशेष अभिरक्षा में रखा जाता है वे एक पृथक से सीलबंद लिफाफे में रिकार्ड रूम में भेजे जाते है रिकार्ड कीपर का यह कर्तव्य है कि इन दस्तावेजो को एक विशेष बक्से में रख कर ताला लगाकर रखे साथ ही मूल अभिलेख में इस बात की प्रविष्टि की जावे की दस्तावेज किस विशेष बक्से में रखे गये है साथ ही संबंधित बक्से पर भी एक स्लीप चिपकाकर प्रकरण क्रमांक पक्षकारों के नाम निर्णय दिनांक न्यायालय का नाम आदि उल्लेख किया जावे इस संबंध में नियम 483 फौजदारी की पालना कि जावे।
  4. नियम 486 और 487 फौजदारी में रिकार्ड रूम में निराकृत प्रकरणों का रिकार्ड निराकरण तारीख के अनुसार रखे जाने के निर्देश है जिनका पालन किया जावे।
  5. नियम 489 के अनुसार प्रत्येक माह की 7 तारीख को या सेशनजज महोदय द्वारा नियत तारीख को रिकार्ड कीपर ये जानकारी देगंे की संबंधित न्यायालयों से गत माह में निराकृत अभिलेख प्राप्त हो चुके है या उनमें से कुछ अभिलेख रोके गये है। रिकार्ड कीपर का यह दायित्व है कि वह यह जानकारी आवश्यक रूप से प्रभारी अधिकारी महोदय में माध्यम से सेशनजज महोदय के समक्ष प्रस्तुत करे जिन न्यायालयों से अभिलेख प्राप्त नहीं हुआ है वहां प्रभारी अधिकारी महोदय के माध्यम से पत्र भिजावे।
  6. नियम 490 फौजदारी के अनुसार रिकार्ड जमा हो जाने पर उसको रिकार्ड रूम में आपराधिक पंजी में पंजीकृत करने के प्रावधान है अतः रिकार्ड कीपर का यह कर्तव्य है कि वह पंजीकरण का कार्य इस प्रकार करे की जमा हुआ कोई भी अभिलेख अनुचित विलंब के बिना पंजीकृत हो जावे । अपील एवं पुनरीक्षण का अभिलेख पृथक से पंजीबद्ध नहीं किया जाता है और मूल अभिलेख अर्थात मूल प्रकरण के साथ ही रखा जाता है और मूल रजिस्टर में इस बाबत प्रविष्टि की जाना चाहिए । नियम 491 फौजदारी को विलंब से प्राप्त अभिलेख के पंजीकरण के समय ध्यान रखना चाहिए साथ ही नियम 492 फौजदारी के निर्देशों को भी पंजीकरण के समय ध्यान रखा जाना चाहिए।
  7. यदि कोई अभिलेख रिकार्ड रूम में आपराधिक मामलों की पंजी में पंजीकृत होने के पूर्व ही रिकार्ड रूम से बाहर भेजा जाता है तब उस अभिलेख के स्थान पर एक ममोरेण्डम उचित प्रारूप में रखा जावेगा। इस मेमोरेण्डम में प्रकरण क्रमांक, प्रकरण का शीर्षक न्यायालय का नाम, निराकृत दिनांक आदि तथ्यों का उल्लेख करना चाहिए इस संबंध में नियम 493 फौजदारी के निर्देशों का ध्यान में रखना चाहिए ।
  8. पंजीकरण पूर्ण हो जाने पर नियम 494 फौजदारी के अनुसार अभिलेखों को कपड़े के बस्ते में बंडल बनाकर रखा जाता है प्रत्येक बस्ते पर बंडल क्रमांक, माह और वर्ष जिसमें की प्रकरण निराकृत किये गये, अभिलेखों को दिया गया पंजीकरण पंजी का क्रमांक नियम 494 में बतलाई विधि के अनुसार लिखा जाता है।
  9. निमय 495 फौजदारी में बस्ते बनाने की विधि पर प्रकाश डाला गया है और उनके आकार का भी वर्णन किया गया है तथा बंडल बनाने के लिए उपयोग में लाये जाने वाले कपड़े के बारे में भी विविरण है इन निर्दैशो का अभिलेखों का बस्ते बनाते समय कडाई से पालन किया जाना चाहिए ताकि रिकार्ड रूम में स्थान का अधिकतम उपयोग हो सके बस्ते एवं अभिलेख सुरक्षित रहे । रिकार्ड का धूल आदि से बचाया जा सके। अतः रिकार्ड कीपर का यह कत्र्तप्व्य है कि नियम 495 फौजादारी का कड़ाई से पालन करे।

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