Criminal Reader ke kartavya

Criminal Reader ke kartavya
क्रिमिनल रीडर/ निष्पादन लिपिक के कर्तव्‍य

1. विभिन्न प्रकार के रजिस्टर मेन्टेन करना –

म0 प्र0 नियम व आदेश आपराधिक जिन्हें आगे नियम कहां जायेगा के नियम 570 में बतलाये गये विभिन्न प्रकार के रजिस्टर मेंटेन करना। उक्त नियम अनुसार निम्न प्रकार के रजिस्टर एक दांडिक न्यायालय में मेंटेन किये जाते है:-

1. प्रारंभिक मामलों का रजिस्टर
यह रजिस्टर सेशन न्यायालय/ अपर सेशन न्यायालय के अलावा सभी मजिस्टेªट न्यायालयों में मेंटेन किया जाता है जो कि प्रारंभिक अधिकारिता का प्रयोग करते है इस रजिस्टर में सभी मूल दांडिक प्रकरण चाहे वे पुलिस चालान के रूप में पेश हुये हो या परिवाद पर दर्ज हुये हो पंजीबद्ध किये जाते है। अन्य न्यायालयों से अंतरित होकर प्राप्त मूल दांडिक प्रकरण इस पंजी में पंजीबद्ध किये जाते है। निष्पादन लिपिक को इस रजिस्टर को सभी काॅलम सावधानी पूर्वक दर्ज करना चाहिये आरोपी का नाम और उसका पूर्ण विवरण अंकित करना चाहिये, प्रकरण के निराकृत होने पर तत्संबंधित पूर्ण व स्पष्ट विवरण अंकित करना चाहिये। जहां केन्द्रीय पंजीकरण या सेंट्रल रजिस्टेªशन की व्यवस्था है वहां सभी प्रकरण एक ही स्थान पर पंजीबद्ध किये जाते है इसका ध्यान रखना चाहिये। क्रिमिनल रीडर /निष्पादन लिपिक का ध्यान नियम 571 से 573 तक की ओर दिलवाया जाता है।

2. विविधि कार्यवाहियों की पंजी या मिसलेनियस कार्यवाहियों की पंजी

यह पंजी नियम 575 और 576 में दिये गये निर्देशों के अनुसार मेंटेन करना चाहिये, नियम 575 में 26 विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का उल्लेख किया गया है जिन्हें इस पंजी में दर्ज किया जाता है।

3. अर्थदंड पंजी ’’ए’’

इस पंजी में प्रत्येक प्रकार के अर्थदंड या अर्थदंड के रूप में वसूली योग्य धन राशि प्रतिकर राशि का उल्लेख किया जाता है। अर्थदंड चाहे वसूल हुआ हो या नहीं इस पंजी में उल्लेखित करना चाहिये और वसूल हो जाने के बाद संबंधित काॅलम में प्रविष्ठि किया जाना चाहिये। प्रत्येक वर्ष के प्रारंभ में एक नई अर्थदंड पंजी ए खोली जाती है जिसमें पूर्व पंजी की वसूल न हो सका समस्त अर्थदंड लाल स्याही से पंजी के प्रारंभ में नियम 578 के अनुसार उल्लेखित किया जाता है। यदि पूर्व पंजी में पर्याप्त कोरे पृष्ठ बचे हो तो उसी पंजी में कुछ पृष्ठ छोड़ कर नवीन वर्ष के लिये पंजी प्रारंभ की जा सकती है। क्रिमिनल रीडर का ध्यान नियम 577, 578, 579, 580 और 581 की ओर दिलवाया जाता हैे जिसमें इस पंजी को मंेटेन करने के बारे में आवश्यक निर्देश दिये है।

4. अर्थदंड पंजी ’’बी’’

इस पंजी में सभी प्राप्त किये गये अर्थदंड कोषालय में जमा कि गई राशियाॅं का उल्लेख किया जाता है, नियम 582 के अनुसार इस पंजी को मेंटेन करना होता है। जैसे ही कोई अर्थदंड किया जाता है उसका उल्लेख अर्थदंड पंजी ए में किया जाता है और उसके जमा हो जाने पर उसका उल्लेख अर्थदंड पंजी बी में किया जाता है। इस अर्थदंड को या अन्य राशियों को जो जमा हुई हो चालान द्वारा कोषालय में जमा करवाया जाता है। पीठासीन अधिकारी के इन पंजीयों पर अर्थात अर्थदंड पंजी ’’ए’’ और ’’बी’’ पर प्रत्येक प्रविष्ठि पर संक्षिप्त हस्ताक्षर लिया जाना चाहिये। क्रिमिनल रीडर /निष्पादन लिपिक का यह कत्र्तव्य है कि वह अर्थदंड पंजी ’’ए’’ व ’’बी’’ चालान बुक और धन प्राप्ति की रसीद बुक की कार्यालय अधीक्षक/ कार्यालय उप अधीक्षक से दैनिक /साप्ताहिक जाॅच करावे और जाॅच में पाई गई कमियों को तत्काल दूर करे।

5. धन प्राप्ति की रसीद पुस्तक

नियम 590 के अनुसार जो भी धन राशि भुगतानकर्ता द्वारा जमा की जाती है उसकी उसे रसीद देना चाहिये यह रसीद पुस्तक दो प्रत में प्रिंट होती है कार्बन लगाकर रसीद बनाई जाना चाहिये मूल प्रत भुगतानकर्ता को दी जानी चाहिये कार्बन पर्त अभिलेख में रखना चाहिये। कार्बन प्रत पर रसीद प्राप्तकर्ता के हस्ताक्षर लेना चाहिये। राशि शब्दों व अंकों दोनों में लिखना चाहिए।

6. निरीक्षण पुस्तिका

क्रिमिनल रीडर का ध्यान नियम 551 की ओर ध्यान दिलवाया जाता है जिसमें, नियम 532 से नियम 544 के अनुसार आपराधिक लेखों का जनता द्वारा निरीक्षण करने संबंधी प्रावधान है जिनको ध्यान में रखते हुये अभिलेख का निरीक्षण करवाना चाहिये और उस पंजी में आवश्यक प्रविष्ठि करना चाहिये।

7. छोड़े गये विकृतचित्तों का रजिस्टर

नियम 584 के अनुसार सभी दांडिक न्यायालयों को यह रजिस्टर रखना होता है और उनके क्रिमिनल रीडर को उसे मेंटेन करना होता है।

8. ज्यूडिशियल डायरी

इसे सामान्य बोल चाल की भाषा में बोर्ड डायरी भी कहते है नियम 10 के उप नियम 2 में इस डायरी को मेंटेन करने बावत् निर्देश दिये गये है जिन्हें ध्यान में रखना चाहिये ज्यूडिशियल डायरी किसी भी दिन विशेष को नियत किये गये और निपटाये गये न्यायिक कार्य के दर्पण के समान होती है इस डायरी को सावधानी पूर्वक मेंटेन करना चाहिये। डायरी के काॅलम नंबर 2 में साक्ष्य अंकित करने में लगा समय, तर्क सुनने में लगा समय अंकित किया जाना चाहिये कोई भी प्रकरण में इस डायरी में अंकित होने से छूटना नहीं चाहिये डायरी के काॅलम नंबर 3 में उस दिन हुई कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण लिखा जाता है नियम 10 के उपनियम 2 में प्रकरणों का वर्गीकरण बतलाया गया है जिसके अनुसार बोर्ड डायरी में प्रकरण चढ़ाना चाहिये। डायरी का कोई भी पृष्ठ न तो फाड़ा जावेगा न ही प्रविष्ठि मिटाई जायेगी आवश्यक सुधार लाल स्याही से की जाना चाहिये। डायरी में प्रकरणों की आगे पोस्टिंग उसी दिन की जाना चाहिये। क्रिमिनल रीडर और निष्पादन लिपिक का ध्यान नियम 10 की ओर दिलवाया जाता है जिससे बोर्ड डायरी मेंटेन करने के आवश्यक निर्देश है।

9. काज लिस्ट

क्रिमिनल रीडर का ध्यान नियम 11 की ओर दिलवाया जाता है जिसमें काज लिस्ट मेंटेन करने के बारे में दिशा निर्देश दिये गये है जिनका पालन करते हुये काज लिस्ट बनायी जाना चाहिये।

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