Criminal reader/Nispadan lipik ke mahatavpurna kartavaya

Criminal reader/Nispadan lipik ke mahatavpurna kartavaya    
  क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का यह महत्वपूर्ण कर्तव्य है

1   कि वह कोर्ट मोहरिर की सहायता से गवाहों के समंस /जमानती वारंट /गिरफ्तारी वारंट न्यायालय के आदेशानुसार जारी करावे और यह जाॅंच करे की आदेशानुसार और सही नाम और विवरण तथा सही पते से समंन /वारंट जारी हो और समय से ही उन्हें प्रेषित/डिसपेज किया जावे।

2         क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का यह कर्तव्य है कि वह निर्वाहित समंन /वारंट को संबंधित प्रकरण में सुनवाई तिथि के एक दिन पूर्व ही संलग्न करें। यदि समंन या वारंट नहीं लौटे है तो संबंधित आरक्षी केन्द्र के कोर्ट मुंशी को बुलाकर उसे अगले दिन ऐसे समंन/वारंट अनिवार्य रूप से लेकर आने हेतु पाबंद करें।
3. जहां आरोपी के समर्पण कर देने से या नई जमानत प्रस्तुत कर देने से पूर्व का वारंट निरस्त हो चुका हो वहां उसे पीठासीन महोदय के हस्ताक्षरित आदेश द्वारा वारंट अनिर्वाहित बुलावे।
4. शासकीय गवाह जैसे डाक्टर, अन्वेषण अधिकारी आदि के वर्तमान पते की एक सूची बनाकर रखे और स्थानांतरिक शासकीय गवाह के वर्तमान पते संबंधित विभाग से पूछताछ कर उक्त सूची में अंकित करें ताकि सही पते पर सूचना पत्र भेजे जा सके।

 मालखाना वस्तुओं के बारे कर्तव्य

1. क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का यह कर्तव्य है कि वह किसी दिन विशेष को नियत प्रकरणों में साक्ष्य के दौरान आवश्यक मालखाना वस्तुओं एक दिन पूर्व ही प्रोपर्टी मेमो भेजकर मालखाना से बुलवाले ताकि साक्षी का साक्ष्य मालखाना वस्तुओं के अभाव में अनावश्यक रोकना न पड़े।
2. क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का ध्यान नियम 124 की ओर दिलाया जाता है जिसमें मालखाना वस्तुओं सुरक्षित अभिरक्षा में रखने संबंधी निर्देश है और मूल्यवान संपत्तियों आभूषण आदि को पीठासीन अधिकारी की उपस्थित में मोहर बंद पेकेट के द्वारा कोषालय या उपकोषालय में जमा करवाने के निर्देश है इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जावे।
3. नियम 125 में कूट रचित दस्तावेजों को या ऐसे दस्तावेजों को जिनके कूट रचित होने का संदेह है सील बंद पेकेट में नाजिर के पास जमा कराने के निर्देश है इस संबंध में नियम 466 की ओर भी क्रिमिनल रीडर / निष्पादन लिपिक का ध्यान आकर्षित किया जाता है।
4. प्रकरण के निराकरण के बाद प्रोपर्टी ममे ो पर मालखाना निराकरण आदेश पूर्ण और स्पष्ट रूप से लिखकर क्रिमिनल रीडर को मालखाना नाजिर के पास भिजवाना चाहिये और प्रकरण के आदेश पत्र पर प्रोपर्टी मेमो की प्राप्ति रसीद भी लेनी चाहिये।

  गवाह खर्च का वितरण

         क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का यह कर्तव्य है कि उपस्थित साक्षीगण को गवाह खर्च के भुगतान के बारे में तत्काल कार्यवाही करें इस संबंध में नियम 558 से 569 की ओर क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का ध्यान आकर्षित किया जाता है शासकीय सेवक को उपस्थित प्रमाण पत्र देना चाहिये और यदि गवाह भत्ता नहीं है तब संबंधित गवाह को मनीआडर द्वारा गवाह भत्ता भेजा जा सके इस ओर भी ध्यान देना चाहिये। क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक को अपने न्यायालय में एक वर्ष में उपस्थित होने वाले गवाहों और उन लगने वाले गवाह खर्च की एक लगभग राशि की जानकारी भी पीठासीन अधिकारी महोदय के माध्यम से सत्र न्यायाधीश महोदय को भिजवाना चाहिये ताकि गवाह खर्च का बजट मांगते समय ऐसी जानकारी उपयोगी हो सके।

 सामान्य निर्देश

1. क्रिमिनल रीडर को Majistrate/न्यायाधीश द्वारा प्रतिदिन किये जाने वाले कार्य को एक डायरी में अर्जित किये गये यूनिट, लिये गये अवकाश आदि विवरण सहित लिखना चाहिये ताकि माह के अंत में वर्क डन का मानचित्र बनाते समय कठिनाई न हो व किसी भी प्रकरण के यूि नट लेना छटू न जावे।
2. प्रदर्श दस्तावेजों पर या साक्ष्य में ग्रहित दस्तावेजों पर प्रकरण क्रमांक, प्रदर्श क्रमांक, प्रमाणित करने वाले पक्षकार का नाम, प्रमाणित करने की तारीख आदि के बारे में नियम 458 के अनुसार प्रविष्ठि कर लेना चाहिये ताकि एक दस्तावेज पर डबल प्रदर्श क्रमांक डलने संभावना न रहे। कभी-कभी डिपोजिशन सीट में प्रदर्श क्रमांक आ जाता है लेकिन संबंधित दस्तावेज पर प्रदर्श नहीं डल पाता है यह संभावना भी नही रहेगी प्रदर्शित दस्तावेजों पर पीठीसीन अधिकारी के हस्ताक्षर भी साथ-साथ होते जावेगे।
3. कोई भी लंबित अभिलेख वरिष्ठ न्यायालय को या निरीक्षण हेतु भेजते ही मांग पत्र को साथ रखते हुये एक आदेश पत्र लिख लेना चाहिये जिस पर प्रकरण भेजने का उल्लेख आगामी तिथि पक्षकारों के नाम उनके अभिभाषकगण के नाम अंकित कर लेना चाहिये इसे सामान्य बोल चाल की भाषा में ’’दास्त’’ कहते है इससे मूल प्रकरण कहां और क्यों गया है पता लग जाता है।
4. मासिक निरीक्षण/ वार्षिक निरीक्षण में पाई गई कमियों को दूर कर पालना प्रतिवेदन अनुचित विलंब के बिना देना चाहिये।
5. किसी दिन विशेष को नियत प्रकरण एक दिन पहले ही निकालकर बोर्ड डायरी से मिलान कर लेना चाहिये ताकि अभिलेख न मिलने को लेकर न्यायिक कार्य में रूकावट न आये।
6. आदेशिका लेखक को आदेशिका जारी करने के लिये तत्काल मूल अभिलेख उपलब्ध कराना चाहिये।
7. जिन न्यायालयों में सीधे अभियोग पत्र प्रस्तुत होते है वहां क्रिमिनल रीडर व निष्पादन लिपिक का यह कर्तव्य है कि वह यह जाॅंच कर लेवे की अभियोग पत्र में संलग्न सूची अनुसार दस्तावेज संलग्न है या नहीं कौन से दस्तावेज मूल है कौन से फोटो प्रति है यह भी देख ले और आवश्यक हो तो पीठासीन अधिकारी का ध्यान भी उस ओर आकर्षित करावे।
8. धारा 357 दं.प्रसं. के तहत दिलवाये गये प्रतिकर के बारे में व्हाउचर बनाने की कार्यवाही यथासंभव शीध्र की जावे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *