Duties of Principal Copyist and Assistant Copyist 2

Duties of Principal Copyist and Assistant Copyist

नियम 517 सिविल में प्रतिलिपिकार के लिये एक न्यूनतम लक्ष्य दिया गया है जिसे उसे पाना चाहिये लेकिन प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार / प्रत्येक लिपिकार का यह कर्तव्य है कि वह इस नियम में बतलाये गये लक्ष्य को न्यूनतम लक्ष्य मानकर अधिक से अधिक कार्य करने का प्रयास करे ताकि पक्षकारों को समय पर प्रतिलिपियाॅं मिल सके और वे न्यायिक कार्यवाही को आगे बढ़ा सके।

नियम 522 सिविल के तहत् प्रत्येक वर्ष जनवरी माह की 20 तारीख तक प्रतिलिपि शाखा के कार्य का एक प्रतिवेदन माननीय उच्च न्यायालय को भेजा जाना चाहिये और इस प्रतिवेदन के साथ प्रारूप नियम 522 में दिया गया है जिसके सभी 1 से 25 तक काॅलम को सावधानी पूर्वक भेरे जाना चाहिये यह प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का कर्तव्य है कि नियम 522 का कड़ाई से पालन करे और संबंधित जानकारी इस नियम में बतलाये गये प्रारूप में और नियम 522 के निर्देशों के अनुसार निर्धारित तिथि तक अवश्य भेजें।

नियम 472 सिविल एवं नियम 636 फौजदारी के तहत प्रतिलिपि आवेदन पत्र प्राप्त होते ही उसे तत्काल लेना चाहिये और यथासंभव आवश्यक जांच उसी समय कर लेनी चाहिये प्रतिलिपि आवेदन पत्र पर नियम 476 सिविल के अनुसार कोर्ट फीस लगी होना चाहिये और डाक से प्राप्त आवेदन पत्र पर यदि कोर्ट फीस नहीं लगी है तब मनीआॅर्डर के साथ जो धन प्राप्त होता उसमें से उक्त डाक टिकट लगायी जायेगी। एक अभिलेख से किसी भी संख्या में प्रतिलिपियाॅं एक ही प्रार्थना पत्र द्वारा मांगी जा सकती है।

यदि कोई पक्षकार शीध्र प्रतिलिपि चाहता है तब वह प्रतिलिपि आवेदन के साथ एक अतिरिक्त प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत करंगे और उस पर शीध्र प्रतिलिपि देने की प्रार्थना और ऐसी प्रार्थना की कारण लिखेगा इस संबंध में नियम 478 सिविल एवं नियम 638 फौजदारी में आवश्यक प्रावधान किये गये है जिनको ध्यान में रखना होता है। सामान्यतः शीघ्र प्रतिलिपि का आवेदन पत्र दो दिन के भीतर निपटा देना चाहिये शीघ्र प्रतिलिपि का व्यय सामान्य प्रतिलिपि के व्यय से दोगुना होता है ऐसे प्रार्थना पत्रों के बारे में प्रतिलिपि आवेदनों की पंजी में रिमार्क काॅलम में लाल स्याही से ’’अतिशीध्र वितरण प्रतिलिपि’’ या एक्सप्रेस डिलेवरी लिखना चाहिये। शीध्र प्रतिलिपि के आवेदन पर नियम 478 सिविल एवं नियम 638 फौजदारी के तहत प्रभारी अधिकारी से आवेदन प्राप्त होते ही उनके समक्ष रखकर उनका आदेश लिया जायेगा।

प्रत्येक प्रतिलिपि प्रार्थना पत्र पर प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार उसके प्रस्तुती की तारीख का पृष्ठांकन करेगा और हस्ताक्षर करेगा और यदि आवेदक उपस्थित है तो उसे निर्धारित प्रारूप में अग्रिम की रसीद देगा इस संबंध में नियम 480 सिविल एवं नियम 640 फौजदारी का कड़ाई से पालन किया जावे।

नियम 481 सिविल के तहत प्रति पृष्ठ या उसके भाग के लिये 1 रूपया शुल्क निर्धारित है और फोटो काॅपी मशीन द्वारा तैयार प्रति के लिये 2 रूपया प्रति पृष्ठ निर्धारित है यह शुल्क कोर्ट फीस स्टाम्प के रूप में संबंधित प्रतिलिपि पर चस्पा किया जावेगा इस नियम में केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को जहां केन्द्र सरकार और राज्य सरकार पक्षकार हो वहां प्रतिलिपि शुल्क में छूट दी गई है।

नक्शे /रजिस्टर/विवरण पत्रक कि प्रतिलियाॅं तैयार करने के बारे में नियम 482 सिविल में प्रावधान है जिन्हंे ध्यान में रखना चाहिये।

नियम 483 सिविल और नियम 643 फौजदारी के तहत प्रतिलिपि प्रार्थना पत्र यदि ऐसे अभिलेख से संबंधित है जो रिकार्ड रूम में है तब प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार रिकार्ड रूम में आवेदन डाक बुक में चढ़ाकर भेजेगा साथ ही नियम 484 सिविल और नियम 644 फौजदारी के तहत लंबित प्रकरणों का अभिलेख संबंधित न्यायालय से आवेदन भेजकर मगं वाया जाता है। प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का यह कर्तव्य है कि वह दिन भर में प्राप्त आवेदन पत्रों को उसी दिन शाम तक रिकार्ड रूम यासंबंधित न्यायालय में भेजे ताकि समय पर अभिलेख प्राप्त हो सके प्रतिलिपि अनुभाग में अनावश्यक आवेदन लंबित नहीं रखना चाहिये। यदि संबंधित अभिलेख उच्च न्यायालय में है या जिला न्यायालय में है नियम 485 सिविल या नियम 645 फौजदारी के तहत् आवेदन पत्र को जिला जज महोदय या सेशन जज महोदय के समक्ष रखना होता है।

नियम 486 सिविल एवं नियम 646 फौजदारी में प्रतिलिपि तैयार करने की विधि दी गई है जिसमें सीट पर कितना स्पेस छोड़ना चाहिये न्याय शुल्क चिपकाने के लिये स्थान छोड़ना चाहिये आदि के बारे में मार्गदर्शन दिया गया है जिसे ध्यान में रखना चाहिये।वर्तमान में फोटो काॅपी मशीन लगभग सभी न्यायालयों में लग चुके है अतः फोटो काॅपी कराते समय भी यथासंभव इन नियमों का पालन करना चाहिये।

नियम 488 सिविल एवं नियम 648 फौजदारी में प्रत्येक प्रतिलिपि पर न्यायालय का नाम पक्षकारों के नाम आदि के उल्लेख संबंधी प्रावधान है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये। प्रायः यह देखा गया है कि इस नियम का कड़ाई से पालन नहीं किया जाता जिससे प्रतिलिपि देखने से यह पता नहीं लगता की वह किस न्यायालय के किस प्रकरण की प्रतिलिपि है अतः इस नियम का कड़ाई से पालन किया जावे।

नियम 489 सिविल एवं नियम 649 फौजदारी में प्रत्येक प्रतिलिपि के अंत में एक टेबल पृष्ठांकित करने के प्रावधान है जिसमें 11 काॅलम होते है जिनको स्पष्ट रूप से भरा जाना चाहिये कई मामलों में परिसीमा अवधि की गणना में यह टेबल अत्यंत महत्वपूर्ण होती है अतः इस टेबल के सभी काॅलम सुवाच्य या पठनीय होने चाहिये यह प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का कर्तव्य है कि वह इस टेबल को पठनीय रूप से अंकित करावे।

नियम 490 सिविल एवं नियम 650 फौजदारी स्टाम्प पर दी जाने वाली प्रतिलिपि के बारे में है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये।

नियम 491 सिविल एवं नियम 651 फौजदारी में जितना व्यय जमा हो वही तक प्रतिलिपि बनाने के प्रावधान है और जब आवेदक उपस्थित होता है तब उसे अतिरिक्त व्यय की मांग की जाना चाहिये। आवेदक को दी गई सूचना का अभिलेख रखा जाना चाहिये।

नियम 492 सिविल एवं नियम 652 फौजदारी में प्रतिलिपि तैयार हो जाने पर उसे देने या डाक से भेजने के पूर्व उस पर प्रधान प्रतिलिपिकार या प्रभारी अधिकारी के हस्ताक्षर करवाने के प्रावधान है और कोर्ट फीस स्टाम्प पंच और केंसल किये है या नही यह देखने के प्रावधान भी है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये ताकि कोर्ट फीस का दुरूपयोग नहीं होना चाहिये।

नियम 493 सिविल एवं नियम 653 फौजदारी में प्रतिलिपियाॅं आवेदकों को व्यक्तिगत रूप से या उनके अधिवक्ताओं या अधिकृत अभिकर्ताओं को देने के प्रावधान है और यदि डाक से प्रतिलिपि चाही गई हो तब डाक से भेजने के प्रावधान है। नियम 494 सिविल और नियम 654 फौजदारी डाक से प्रतिलिपियाॅं भेजने के बारे में है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये।

नियम 495 सिविल वसियत नामे के प्रतिलिपि के बारे में है जिसका पालन किया जाना चाहिये।

प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का उक्त नियमों के तहत यह कर्तव्य है की वह कार्यालय समय में प्रतिलिपि आवेदन पत्र ग्रहण करे उसके साथ दिये जाने वाले धन की तत्काल डूप्लीकेट रसीद बुक में रसीद देवे आवेदक को प्रतिलिपि लेने के लिये तिथि देवे। दिन भर में प्राप्त आवेदन पत्रों को उसी दिन शाम को रिकार्ड रूम या संबंधित न्यायालय को विधिवत भेजे अभिलेख आते ही प्रतिलिपि करावे और यथासंभव यथाशीध्र प्रतिलिपि का वितरण करे। जहां एक से अधिक कर्मचारी प्रतिलिपि अनुभाग में नियुक्त हो वहां प्रधान प्रतिलिपिकार को प्रभारी अधिकारी महोदय से मार्गदर्शन लेकर उनमें कार्य विभाजन लिखित रूप से कर देना चाहिये ताकि प्रत्येक कर्मचारी को अपना कार्य पता रहे और दायित्व निर्वाहन करते समय भी कठिनाई न हो।

प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार तथा प्रतिलिपि अनुभाग के प्रत्येक कर्मचारी का यह कर्तव्य है कि आवेदकों, अधिवक्तागणों से विनम्रता पूर्वक आवश्यक वार्तालाप ही करे उनके द्वारा चाही गई जानकारियाॅं उन्हें अवश्य देवे कुछ जानकारियाॅं जैसे एक पृष्ठ के लिये लगने वाला शुल्क फोटो प्रति पर लगने वाला शुल्क आदि बड़े अक्षरों में लिखकर लगाया जा सकता है ताकि संबंधित व्यक्ति उसे देखकर जानकारी प्राप्त कर सके।

प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का यह कर्तव्य है कि वह अपने अनुभाग की फोटो काॅपी मशीन /टाईप मशीन की समय पर सर्विसिंग करवाते रहे उनके रख रखाव पर ध्यान देवे। टाईप मशीन के कार्बन या फोटो काॅपी मशीन के टाॅनर की व्यवस्था युक्तियुक्त समय के पूर्व करके रखे ताकि अनावश्यक काम न रूके।

किसी भी दशा में कोई भी अभिलेख प्रभारी अधिकारी महोदय के लिखित आदेश के बिना प्राईवेट फोटो काॅपी मशीन पर नहीं जाना चाहिये इस नियम का कड़ाई से पालन किया जावे।

जिन आवेदन पत्रों में त्रुटियाॅं है या और धन जमा होना है उनकी सूचना प्रतिलिपि शाखा के नोटिस बोर्ड पर भी लगाई जा सकती है ताकि उसे देखकर ही संबंधित आवेदक को कमियों का पता लग सके और वह आवश्यक पूर्ति कर सके।

प्रतिलियाॅं जिस क्रम में आवेदन पेश हुए है उसी क्रम में तैयार करके दी जाना चाहिये और एक्सप्रेस डिलेवरी के आवेदन पत्रों को छोड़कर इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये। प्रतिलिपि शाखा के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिये प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार एक ऐसा सूचना पटल भी अपने अनुभाग में रख सकते है जिसमें एक दृष्टि में देखते ही या एट ए ग्लांस यह पता लग सके की किस नंबर तक के

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