Duties of Principal Copyist and Assistant Copyist 1

प्रधान प्रतिलिपिकार एवं सहायक प्रतिलिपिकार के कर्तव्य

जिला मुख्यालय पर एक प्रधान प्रतिलिपिकार का पद होता है और तहसील स्तर पर सहायक लिपिकार का पद होता है। जिला मुख्यालय पर सहायक प्रतिलिपिकारों के पद भी होते है इनके कर्तव्य निम्नानुसार है:-

  1. नियम 496 म.प्र. सिविल न्यायालय नियम 1961 जिसे आगे सिविल नियम कहां जायेगा के अनुसार प्रधान प्रतिलिपिकार को निम्न लिखित रजिस्टर मेन्टेन करना होता है, तहसील स्तर पर सहायक प्रतिलिपिकार को यह रजिस्टर मेन्टेन करना होता है:-
स. क्रमांक रजिस्टर का नाम रिमार्क
  1. प्रतिलिपि आवेदन पत्रों का रजिस्टर
  2. एकाउंट बुक
  3. विस्तृत या डिटेल्ड एकाउंट बुक
  4. डूप्लीकेट रसीद बुक
  5. नाजिर के साथ होने वाले संव्यवहार की पास बुक ए एवं बी
  6. व्यय न किये गये अग्रिमों की सूची
  7. डाक बुक
  8. मनीआर्डर की काउंटर फाइल

म.प्र. नियम एवं आदेश आपराधिक जिन्हें आगे आपराधिक नियम कहां जायेगा के नियम 655 में भी उक्त रजिस्टर की सूची दी गई है।

प्रधान प्रतिलिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार का यह कर्तव्य है कि वह अपने अनुभाग के किसी सहज दृश्य या आसानी से दिखलाई देने वाले स्थान पर उक्त रजिस्टर की एक सूची लगा कर रखे ताकि यह पता लग सके की प्रतिलिपि शाखा में कौन-कौन से रजिस्टर रखे जाते है इन नियमों में इन रजिस्टर के सुरक्षित रखने की अवधि भी दी गई है जिसे ध्यान में रखना चाहिये।

सभी प्रतिलिपि आवेदन पत्र चाहे वे डाक से प्राप्त हुये हो या व्यक्तिगत तौर पर या अधिवक्ता या अधिकृत अभिकर्ता द्वारा प्रस्तुत किये गये हो उन्हें प्रतिलिपि के आवेदन पत्रों के रजिस्टर में एक वार्षिक क्रमों की संख्या में प्रविष्ट किया जावेगा डाक से प्राप्त प्रार्थना पत्रों की क्रम संख्या की बाई ओर रजिस्टर में लाल स्याही से शब्द ’’पी’’ लिखा जायेगा अतः प्रधान लिपिकार/सहायक प्रतिलिपिकार नियम 497 सिविल एवं 657 आपराधिक नियम को ध्यान में रखे और इसी के अनुसार सभी आवेदन पत्रों को जिस क्रम वे प्राप्त होते है प्रतिलिपि के आवेदन पत्रों के रजिस्टर में उन्हें दर्ज करें कोई भी आवेदन बिना इस रजिस्टर में दर्ज किये नहीं रहना चाहिये। प्रतिलिपि के आवेदन पत्रों जिनमें की प्रतिलिपियाॅं दी जा चुकी है या जिनमें प्रतिलिपि तैयार किये बिना अग्रिम वापिस किया जा चुका है या डाक से बिना अग्रिम के बिना प्राप्त हुई या बाद में भी उनका अग्रिम प्राप्त नहीं हुआ को प्रतिलिपि दिये जाने व अग्रिम वापिस किये जाने की तारीख से 6 माह तक सुरक्षित रखा जाता है अन्य सभी आवेदन पत्रों के उनकी प्राप्ति दिनांक से 3 वर्ष की अवधि तक सुरक्षित रखा जाता है। नियम 497 सिविल के नोट को इस संबंध में ध्यान रखा जावे और उसकी पालना की जावे।

आवेदकों से व्यक्तिगत रूप में प्राप्त या मनीआॅर्डर द्वारा आवेदन पत्र सहित प्राप्त धन की प्रविष्टि प्रधान प्रतिलिपिकार/सहायक प्रतिलिपिकार द्वारा प्रतिलिपि के आवेदन पत्रों के रजिस्टर एवं हिसाब की विस्तृत पुस्तिका या डिटेल्ड एकाउंट बुक में की जायेगी हिसाब की विस्तृत पुस्तिका काॅलम नंबर 3 से 7 तक का योग एकाउंट बुक के उचित काॅलम में ले लिया जायेगा इस संबंध में नियम 498 दिवानी एवं नियम 657 फौजदारी का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये और सभी प्राप्त धन को उक्त अनुसार इंद्राज करना चाहिये।

जब कोई प्रतिलिपि अवितरित रह गई हो या जब किसी प्रार्थना पत्र से धन या सही जानकारी के अभाव के कारण 30 दिन तक कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी हो या मनीआर्डर द्वारा प्राप्त धन से संबंधित प्रार्थना पत्र 30 दिन तक प्राप्त नहीं होता है तब व्यय न किये गये अग्रिम को व्यय न किये गये अग्रिमों की सूची के काॅलम नं. 1, 2 और 3 में प्रविष्ट किया जायेगा, ऐसे प्रार्थना पत्र एवं उसके संबंध में प्रयोग में लाये गये पत्रों को रिकार्ड रूम में जमा कर दिया जायेगा। यदि आवेदक बाद में और अग्रिम जमा कराता है या सही जानकारी देता है तब प्रतिलिपि का कार्य पुनः प्रारंभ किया जावेगा एवं प्रधान प्रतिलिपिकार प्रतिलिपि के आवेदन पत्रों के रजिस्टर के रिमार्क काॅलम में उस प्रार्थना पत्र को पुनः स्थापित या रिस्टोर के रूप में दिखायेगा या दर्ज करेगा। किन्तु प्रतिबंध यह है कि जब प्रतिलिपिकरण बंद करने की तारीख और अग्रिम देने या सही जानकारी देने की तारीख के बीच का विलंब 4 माह से अधिक हो तब यदि प्रभारी अधिकारी उस विलंब को क्षमा कर दे तभी उस आवेदन पर प्रतिलिपि बनाने का कार्य पुनः प्रारंभ किया जायेगा और इस संबंध में व्यय न किये गये अग्रिमों की सूची के संबंधित काॅलम में आवश्यक इंद्राज किये जावेगे। अवितरित प्रतिलिपियाॅं उनके सर्वप्रथम अवितरित होने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि तक सुरक्षित रखी जायेगी। प्रधान प्रतिलिपिकार/ सहायक प्रतिलिपिकार का ध्यान नियम 499 सिविल एवं नियम 658 फौजदारी की ओर दिलाया जाता है जिसमें उक्त प्रावधान किया गया है।

नियम 500 दिवानी एवं नियम 659 फौजदारी के अनुसार यदि आवेदन को देय धन का बाकी मनीआॅर्डर वापस आ जाता है, तब इस प्रकार प्राप्त अनपेड एमाउंट की प्रविष्टि प्रतिलिपि आवेदन पत्रों के रजिस्टर के काॅलम नं. 14 एवं डिटेल्ड एकाउंट के काॅलम नं. 4 में की जायेगी एवं व्यय न किये गये अग्रिमों की सूची में भी नियम 499 सिविल में बतलायी विधि के अनुसार प्रविष्टि की जायेगी। डाक से भेजी गई प्रतिलिपियाॅं वापस लौटने पर रिकार्ड रूम में जमा की जायेगी।

प्रधान लिपिकार /सहायक प्रतिलिपिकार को माह में एक बार कोषालय या उप कोषालय से सादे पत्र या सीट मंगवाना होती है प्रायः 480 सादे पत्रों की रिम एक बार में मंगवा लेना चाहिये ताकि कोषालय का कार्य कम हो सके। अनुभाग के आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिये की प्रायः एक माह में कितनी सीट लगती है उसी अनुसार मांग पत्र भेजना चाहिये मांग पत्र दो प्रतियों में बनता है मांग पत्र पर न्यायालय अधीक्षक या राजपत्रित अधिकारी के काउंटर साइन करवाना चाहिये मांग पत्र की एक प्रतिलिपि कोषालय या उप कोषालय भेजी जाती है और कार्यालय प्रति प्रधान प्रतिलिपिकार / सहायक प्रतिलिपिकार के पास रहती है। प्रधान प्रतिलिपिकार प्रत्येक प्रतिलिपिकार को प्रत्येक दिन भर के कार्य के लिये पर्याप्त मात्रा में सादे पत्र या सीट देंगे और शाम को तैयार प्रतिलिपि उनसे लंेगे सीट का हिसाब सादे नोट बुक में रखेंगे। प्रधान प्रतिलिपिकार सादे पत्रों या सीटों के सही बेलंेस के लिये उत्तरदायी है अतः उन्हें इन पत्रों को एक संदूक में ताला लगाकर रखना चाहिये और इनका प्रतिदिन का हिसाब भी रखना चाहिये।

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