gopaneey prativadan ke lie saamaany nirdesh

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गोपनीय प्रतिवेदन के सामान्य निर्देश क्या हैं पुस्तक परिपत्र भाग 1 क्रमांक 7 में दिए गए निर्देशों के अनुसार गोपनीय प्रतिवेदन अत्यंत सावधानी से लिखें जाना चाहिए क्योंकि उस पर अधिकारी का  भविष्य निर्भर कर रहता है रिपोर्ट लिखने वाले अधिकारी को आप पर्याप्त सामग्री या सुनी सुनाई बातों के आधार पर स्पष्ट टिप्पणियां और मत देना या निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए इस बात की भी सावधानी रखनी चाहिए कि गोपनीय प्रतिवेदन लिखने वाले अधिकारी को अपनी व्यक्तिगत पसंद और नापसंद को अलग रखकर लिखना चाहिए

गोपनीय प्रतिवेदन लिखने वाले अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्य व आचरण का सावधानीपूर्वक हमेशा अवलोकन करते रहे गोपनीय प्रतिवेदन ऐसे अवलोकन ओ और नियतकालिक निरीक्षण के परिणामों तथा अधिकारी के ऐसे कार्यों पर आधारित होनी चाहिए जो उसकी दृष्टि में आए यदि इसके बावजूद भी वह आवश्यक समझे कि किसी अधीनस्थ प्राधिकारी की राय आवश्यक है तो वह उसे गोपनीय रूप से मंगा सकता है किंतु अपनी रिपोर्ट उसके द्वारा पूरी जिम्मेदारी के साथ ही लिखी जानी चाहिए  गोपी प्रतिवेदन के लिखने से किसी अधिकारी को यह दिखाने का अवसर मिलता है कि वह सतर्क पर्यवेक्षक है और उसमें चरित्र का सही सही मूल्यांकन करने की क्षमता है

किसी भी रिपोर्ट लिखने वाले अधिकारी को अपने किसी निकट संबंधी के कार्य पर अपनी राय नहीं देनी चाहिए  प्रतिवेदन में सामान्यतः इस विषय में राय व्यक्त की जानी चाहिए कि संबंधी अवधि के दौरान अधिकारी ने अपने विभिन्न कर्तव्यों का पालन किस प्रकार किया है और इसमें उसके व्यक्तित्व चरित्र और योग्यताओं का मूल्यांकन होना चाहिए हटवा अति गुप्त गुप्त शाखाओं आदि के कार्य करने वाले या प्रभाव धारण करने वाले शासकीय कर्मचारियों के संबंध में रिपोर्ट लिखते समय विशेष कर विभागीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मामले में उनकी विश्वसनीयता का विशिष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए   साधारण उस अधिकारी के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी जिस ने वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी प्रभार में 3 माह से कम समय तक काम किया है क्योंकि हो सकता है कि इतनी अत्यधिक अल्पावधि में रिपोर्ट लिखने वाले अधिकारी को उसके अधीनस्थ के कार्य का अवलोकन करने का पर्याप्त अवसर ना मिला हो आठवां यदि अधिकारी वित्तीय वर्ष में 3 महीने से अधिक समय तक किसी भी कार्य के प्रभार में ना रहा हो तो उसकी रिपोर्ट उस सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखी जाए भीगी जिसके अधीन वित्तीय वर्ष में उसने अधिकतम अवधि तक कार्य किया हो नोवा सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापन के अनुसार यदि किसी अधिकारी को उच्च पद के चालू कार्यभार संभालने के लिए अधिकृत किया जाता है तो वह अपने मूल पद के समकक्ष पदों में कार्यरत अधिकारियों को गोपनीय चरित्रावली अमेठी का अंकित नहीं कर सकता किंतु अपने अधीनस्थ अधिकारियों की चरित्रावली लिखने के लिए सक्षम है

सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापन के अनुसार प्रतिवेदन पुनरीक्षित एवं स्वीकृत करता अधिकारी में से कोई भी गोपनीय चरित्रावली में टीका लिखने से पूर्व सेवानिवृत्त हो जाता है तो वह उसके द्वारा नहीं लिखी जाएगी बल्कि उसके उत्तराधिकारी जिसने वित्तीय वर्ष के दौरान 3 माह में अधिक समय तक काम किया हो के द्वारा लिखी जाएगी . निलंबित शासकीय सेवकों की गोपनीय चरित्रावली में माता अंकन पूरे वर्ष में किए गए कार्य का समग्र मूल्यांकन के आधार पर उनके कार्यों के संबंध में टीम अंकित की जाती है निलंबित शासकीय सेवकों द्वारा निलंबन अवधि में कोई शासकीय कार्य नहीं किया जाता है और अपने लंबे शासकीय सेवकों के गोपनीय प्रतिवेदन में सामान्यतः कोई टीम नहीं अंकित किया जाता है निलंबित शासकीय सेवकों के गोपनीय प्रतिवेदन लिखते समय संबंधित अधिकारी द्वारा इस आशय का भी माता अंकन किया जाना चाहिए कि निलंबित शासकीय सेवक निलंबन की अवधि में बिना अनुमति के अनुपस्थित तो नहीं रहा है तथा उसके द्वारा कोई व्यवसाय नौकरी आदि तो नहीं की जा रही है यदि उसके विरुद्ध विभागीय जांच चल रही है तो इस संबंध में टिप दी जाए कि उसके द्वारा विभागीय जांच की कार्यवाही में सहयोग किया जा रहा है अथवा नहीं किया जा रहा है

क्या आप जानते हैं कि गोपनीय प्रतिवेदन लिखने की अवधि क्या है

 इसके संबंध में सारी जानकारी नीचे दी जा रही है तो चलिए बात करते हैं कि गोपनीय प्रतिवेदन लिखने की अवधि क्या है शासकीय सेवकों के संबंध में गोपनीय प्रतिवेदन उसके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रतिवर्ष के लिए लिखे जाना चाहिए दूसरा परिवीक्षा पर नियुक्ति किए गए शासकीय सेवकों के संबंध में उनकी संपूर्ण परिवीक्षा अवधि के दौरान जब तक कि उन्हें स्थाई ना कर दिया जाए अर्धवार्षिक की गोपनीय प्रतिवेदन लिखिए जाना चाहिए समस्त अस्थाई शासकीय सेवकों के मामले में भी शासकीय सेवा में उसकी प्रथम नियुक्ति में प्रथम दो वित्तीय वर्षों तक अर्थ वार्षिकी गोपनीय प्रतिवेदन लिखिए जाना चाहिए

गोपनीय प्रतिवेदन मैं प्रतिकूल प्रविष्टि ओ की सूचना के संबंध में जानकारी

1 केवल ऐसी टिप्पणियां ही सन सूचित की जाना चाहिए जिनके आधार पर कार्य में सुधार किया जा सकता है किंतु जब ऐसा किया जाए तो संपूर्ण प्रतिवेदन का सारांश जिसमें अधिकारी की प्रशंसा में कही गई बात भी सम्मिलित हो संशोधित की जाना चाहिए

2 गोपनीय प्रतिवेदन लिखते समय लिखने वाला अधिकारी यदि यह महसूस करता है कि जिस शासकीय सेवकों का गोपनीय प्रतिवेदन वह लिख रहा है उसमें ऐसी कुछ खामियां हैं जिनका गोपनीय प्रतिवेदन में समावेश करना उचित नहीं समझा गया है तो वह अधिकारी प्रथक से अर्ध शासकीय पत्र द्वारा संबंधित सरकारी कर्मचारी को उसकी ऐसी खामियां बताएगा तथा वह यह भी कहेगा कि इन खामियों का उल्लेख गोपनीय प्रतिवेदन में नहीं किया जा रहा है

3 प्रत्येक शासकीय सेवकों को उसे सन सूचित की गई प्रतिकूल टिप्पणियों के विरुद्ध प्रतिवेदन देने के लिए स्वतंत्र होगा प्रतिकूल प्रविष्टि यों के विरुद्ध दिया जाने वाला प्रतिवेदन सूचना के दिनांक से 3 माह के अंदर दिया जाना चाहिए चौथा शासकीय सेवकों को गोपनीय चरित्रावली में जहां प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा अंकित की गई थी का प्रतिकूल स्वरूप की हो किंतु समीक्षा करता अधिकारी एवं स्वीकृत करता अधिकारी ने स्पष्ट रूप से असहमति अंकित की हो तो ऐसी स्थिति में उच्च अधिकारी का ही मत सही मूल्यांकन माना जाएगा तथा तदनुसार मूल्यांकन किया जाना चाहिए भी

मध्यप्रदेश में ऐसे बहुत से कर्मचारी हैं जिनके साथ इस प्रकार से गोपनीय प्रतिवेदन लिखा जाता है जिससे उनका अत्यन्त नुकसान होता है ऐसा किसी भी गोपनीय प्रतिवेदन लिखने वाले प्राधिकारी को नहीं करना चाहिए

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