karmachaareegan ke saamaany vyavahaar aacharan aadi ke baare mein nirdesh

कर्मचारीगण के सामान्य व्यवहार आचरण आदि के बारे में निर्देश

karmachaareegan ke saamaany vyavahaar aacharan aadi ke baare mein nirdesh

             ये निर्देश समस्त कर्मचारीगण के लिए चाहे वे किसी भी न्यायालय में या किसी भी शाखा में किसी भी पद पर पदस्थ हो समान रूप से लागू होते है इन निर्देशों की पालना करने से अनावश्यक तनाव और शिकायतों से बचा जा सकता है और कर्मचारी की छबी भी अच्छी बनती है ये निर्देश निम्न प्रकार से है:-

समय की पाबंदी एवं समय प्रबंधन

1. यह प्रत्येक कर्मचारी का कर्तव्य है कि वह अपने कार्यालय में ठीक समय अर्थात प्रातः 10ः30 पर या इसके कम से कम 5 मिनट पहले नियमित रूप से आवे और कार्यालय समय समाप्त होने अर्थात शाम 5ः30 बजे के पूर्व कार्यालय न छोड़े समय की पाबंदी प्रत्येक शासकीय सेवक का एक अनिवार्य गुण होता है प्रायः इसमें कई कर्मचारी असफल देखे जाते है। प्रत्येक कर्मचारी ने अपने शैक्षणिक काल में परीक्षाएॅं अवश्य दी होगी या रेल या बस से यात्रा अवश्य की होगी याद कीजिये कितने बार ऐसा हुआ है की आप परीक्षा में ठीक समय नहीं पहुंचे या आपकी रेल या बस आपके विलंब से पहुंचने के कारण छूट गई ऐसा सामान्यतः नहीं के बराबर हुआ होगा जब आप परीक्षा देने समय पर पहुंच सकते है रेल और बस के समय पर रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन इसी टेªफिक में से होकर और इन्ही परिस्थितियों में पहुंच सकते है तब अपने कार्यालय पर समय पर क्यों नहीं पहुंच सकते आवश्यकता केवल इच्छा शक्ति की है और समय पर पहुंचने को गंभीरता से लेने की है अतः प्रत्येक कर्मचारी समय की पाबंदी की आदत विकसित करे।

2. समय पर कार्यालय ही पहुंच जाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि कर्मचारी का अपनी सीट पर बैठना और कार्य आरंभ कर देना भी आवश्यक है यदि प्रातः ठीक समय पर अपने पद का कार्य प्रारंभ कर दिया जावे और आपके द्वारा कार्यालय समय में बिताये गये समय पर यदि कड़ी नजर रखे और समय की बरबादी न होने दे तो आपका कार्य कार्यालय समय में ही काफी सीमा तक निपट सकता है कुछ सेक्शन अपवाद हो सकते है जहां अतिरिक्त समय बैठना आवश्यक होता है लेकिन सामान्य कर्मचारी यदि प्रातः 10ः30 बजे अपने पद का कार्य प्रारंभ कर देता है तो उसे शाम 5ः30 बजे तक लंच समय को छोड़कर साढ़े 6 घंटे मिलते है किसी दिन इस साढ़े 6 घंटे पर नजर रखकर देि खये कि इस समय का उपयोग आपने कैसे और किस काम में किया और कहां-कहां अनावश्यक समय बिताया ऐसा देखने से आप समय का प्रबंधन करना सीखेगे और एक बार समय की पाबंदी और समय का प्रबंधन आप सीख गये तो आप के कार्य और कार्य की गुणवत्ता सुधरेगी।

डेस कोड

3. न्यायालय के लिपिक वर्गीय कर्मचारीगण के लिए कोई डेªस कोड नहीं है लेकिन न्यायालय के कर्मचारीगण साधारण और सोबर डेªस पहनते है तो यह उनके कार्य की प्रकृति को देखते हुये उचित रहेगा न्यायालय में अधिक भडकीले कपड़े पहनकर आना उचित नहीं माना जा सकता अतः अपने व्यक्तित्व के अनुरूप साधारण वेषभूषा प्रत्येक कर्मचारी के लिये उचित रहती है इसका यथासंभव ध्यान रखा जाना चाहिये।

मोबाइल का प्रयोग

4. वैज्ञानिक अविष्कार को उनके सही रूप में यदि प्रयोग किया जाये तो वे वरदान हो जाते है यदि इनका दुरूपयोग किया जाये तो ये अभिशाप हो जाते है यही स्थिति मोबाइल पर भी लागू होती है यह सुविधा इसलिए बनी है कि अत्यावश्यक परिस्थिति में किसी व्यक्ति से सीधे संपर्क किया जा सके ताकि समय और धन की बचत हो सके अतः यह प्रयास किया जाना चाहिये की कार्यालय समय में अत्यावश्यक परिस्थिति को छोड़कर मोबाइल का प्रयोग न किया जाये उसे साइलेंट मोड पर रखा जावे अपने परिचितों, रिश्तेदारों को यह बतलाया जा सकता है कि वे अपवादित परिस्थितियों को छोड़कर कार्यालय समय में उन्हें मोबाइल पर संपर्क न करे ऐसा करने से आपका बहुमूल्य समय बचेगा।
5. मोबाइल पर अत्यावश्यक परिस्थिति में केवल की काम की बात करके या सुनकर उसे तत्काल काट देना चाहिये और इस वैज्ञानिक सुविधा का सद्उपयोग करने का प्रयास करें इसके दुरूपयोग से बचे।

पक्षकारों, अभिभाषकगण, साथी कर्मचारीगण से बर्ताव

6. आपके कार्यालय में न्यायालय में आने वाले पक्षकार, गवाह, अभिभाषकगण एवं आपके साथी कर्मचारीगण से नम्रता पूर्वक और मधुर व्यवहार करे अपशब्दों का प्रयोग न करे यदि सामने वाला ऐसा कर भी रहा है तो यह जानने का प्रयास करे की उसके ऐसे व्यवहार का क्या कारण है उसकी क्या परेशानी है उसे आप कैसे दूर कर सकते है इन सब बातों को सोचकर फिर भी उसके प्रति अच्छे व्यवहार का प्रयास करे। अप्रिय स्थिति बने उसके पहले संबंधित पीठासीन अधिकारी या शाखा प्रमुख के ध्यान में उक्त तथ्य लावे।
7. कुल मिलाकर आपको अपनी ओर से विवाद को टालने के प्रयास करने चाहिये और अच्छा व्यवहार करना चाहिये।

अवकाश

8. प्रायः बिना अवकाश स्वीकृत कराये या संबंधित अधिकारी से अनुमति लिये बिना अवकाश पर न जावे अनावश्यक अवकाश लेने से बचे। मुख्यालय पर रहे अवकाश के दिन भी मुख्यालय छोड़ने की अनुमति लेकर जावे डेली अप-डाउन से बचे और यदि ऐसा कर भी रहे है तो इससे कार्य प्रभावित न हो इसका ध्यान रखे। प्रत्येक शासकीय सेवक को नियमों के अनुसार उसके मुख्यालय पर ही रहना चाहिये।

अन्य निर्देश

9. अपनी शाखा में जिला नाजिर /पीठासीन अधिकारी को कहकर अपनी सीट पर अपने नाम की एक प्लेट जिसमें पद भी लिखा हो लगवावे ताकि न्यायालय में आने वाले सभी व्यक्ति यह पता लग सके की कौन सा कर्मचारी किस शाखा का कार्य देख रहे है।
10. अपनी सीट पर अपनी शाखा से भेजे जाने वाले मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक और वार्षिक नक्शे जानकारियाॅं आदि की सूची अपने टेबल ग्लास के नीचे लगाकर रखे ताकि उसे देखते ही आपको यह पता लग जाए की कौन सी जानकारी किस तारीख तक भेजना है या भेज दी है समय पर प्रत्येक जानकारी और नक्शे भेजे।
11. अपने पद का कार्य पूर्ण समर्पण भावना से करें जिस भी जगह पदस्थ हो वहां सभी कर्मचारियों के साथ तालमेल बिठाकर टीम भावना से कार्य करे अपना कार्य अच्छे से अच्छे ठंग से करे और कार्य की गुणवत्ता लगातार सुधारते रहे।
12. जिन कर्मचारियों के जो कर्तव्य बतलाये गये है उनके अतिरिक्त भी यदि पीठासीन अधिकारी या प्रभारी अधिकारी समय≤ पर जो भी कार्य बतलाते है उसे करना है बतलाये गये कत्र्तव्यों में कोई कर्तव्य छूट भी गया हो तो इसका तात्पर्य यह भी नही है कि वह कर्तव्य उस कर्मचारी का नहीं है या जो कर्तव्य बतलाये गये है केवल उतना ही काम करना है।
13. कभी भी पीठासीन अधिकारी/ प्रभारी अधिकारी की अनुमति के बिना अपनी सीट से अधिक समय के लिये न जाये और यदि 10 से 15 मिनट से अधिक समय के लिये कही जा रहे है तो पीठासीन अधिकारी /प्रभारी अधिकारी से अनुमति लेकर ही जावे।

ईमानदारी

14. प्रत्येक शासकीय सेवक का यह कर्तव्य है कि वह अपने पद का कार्य पूर्ण इमानदारी से करे इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि यदि किसी व्यक्ति का कोई काम हो गया है और वह आपको कुछ भेट देना चाहता है और यदि आप विनम्रता पूर्वक भेंट लेने से इंकार करते है और यह कहते है की यह तो मेरे कर्तव्य है तो इसे अमृत-पान कहां जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का कोई काम हो गया है या आपने कर दिया है और वह कोई भेंट नहीं देता है और उससे कुछ मांग करते है तो इसे विष-पान कहां जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का कोई काम हो गया है या आपने कर दिया है और वह कोई भेंट नहीं देता है और आप उससे यह मांग करते है कि उस काम के बदले एक निश्चित भेंट ही लेंगे उससे कम नहीं लेंगे तो इसे रक्त-पान कहां जा सकता है। आप अमृत-पान का प्रयास किजिये क्योंकि अमृत लिये तो समुद्र का मथ्ं ान हुआ था और देवताओं और दानवों में सध्ं ार्ष हुआ था यहां आपको एक ऐसे व्यक्ति का कार्य करना है या करते है जो सबदरू से निराश होकर न्यायालय में आता है क्योंकि कोई भी व्यक्ति न्यायालय में जाने का विकल्प सामान्यतः सबसे अंत में चुनता है जब सब प्रयास विफल हो जाते है तब वह न्यायालय की शरण लेता है ऐसे व्यक्ति के लिये यदि आप कोई वैधानिक सेवा करते है तो यह निश्चित रूप से अमृत-पान के समान पुण्य का काम है इसका लाभ लिजिये।

कठोर परिश्रम

15. कठोर परिश्रम से कभी मत घबराईये यदि आप समय पर कार्यालय आकर समय पर ही अपने पद का कार्य प्रारंभ कर देते है और यह कार्य पूर्ण एकाग्रचित और पूरे कठोर परिश्रम से करते है तभी आप अपने विभाग को श्रेष्ठ सेवा दे पायेंगे। कठोर परिश्रम से कभी मत घबराईये।
स्वास्थ्य
16. वर्तमान समय में स्वास्थ्य एक बहुत जटिल समस्या बन गयी है वास्तव में यह उतनी जटिल है नहीं जितनी बन जाती है यदि हम नियमित 24 घंटे में से मात्र 45 से 60 मिनट अपने शरीर को प्राणायाम, धूमना या अन्य व्यायाम में देते है तो इस समस्या से बहुत सीमा तक मुक्ति पा सकते है अतः अपने शरीर के लिये 24 घंटे में से मात्र 45 से 60 मिनट अवश्य निकाले।

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