Najir Ke kartavya 2

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10. नियम 466 सिविल में भी इन रजिस्टर के बारे में आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये है जिनका पालन किया जाना चाहिये और इन रजिस्टर का सभी न्यायालयों के लिये एक ही सेट रखना चाहिये जब जमा के भुगतान कि लिये प्रार्थना पत्र प्रस्तुत होता तब नाजिर को उस पर रिपोर्ट देना चाहिये और नियम 466 के निर्देशों को ध्यान में रखते हुये भुगतान करना चाहिये।
11. नियम 467 दिवानी में डाक द्वारा भेजे गये प्रोसेस की डाक बुक को मेन्टेन करने के बारे में निर्देश दिये गये है इस पंजी में डाक द्वारा भेजे गये प्रोसेस को चढ़ना चाहिये।
12. नाजिर को कुछ प्रोसेस चुन कर उन्हें जांच के लिये सेल अमीन को देना चाहिये और नियम 468 के तहत् संबंधित पंजी में इसका प्रविष्टि करना चाहिये। ऐसे प्रोसेस जिनमें तामिल संदेहास्पद हो उनकी जांच सेल अमीन से अवश्य करवाना चाहिये।
13. नियम 469 सिविल के अनुसार नाजिर को सेल अमीन द्वारा किये गये कार्य का रजिस्टर मेंटेन करना चाहिये और नीलामी की तिथियाॅं इस प्रकार से न्यायालय द्वारा पूछने पर बताना चाहिये प्रत्येक नीलाम और विक्रय पूर्ण हो सके सेल अमीन के विक्रय के कार्यक्रम को तीन माह पूर्व मंजूरी के लिये प्रभारी अधिकारी के माध्यम से जिला जज महोदय को भेजना चाहिये और ऐसे कार्यक्रम की सूचना प्रत्येक न्यायालय को दी जाना चाहिये ताकि वह विक्रय की तिथियाॅं उसी अनुसार लगावे।
14. नाजिर जो भी धन प्राप्त करता है उसकी वह नियम 470 सिविल के अनुसार धन पावती की पुस्तिका में उसकी प्रविष्टि करेंगा और रसीद दो प्रत में तैयार की जावेगी और मूल प्रत धन जमा करने वाले को दी जावेगी इस नियम का कड़ाई से पालन की जावेगी। 15. नियम 471 सिविल के अनुसार नाजिर को सिक्यूरिटी जमा का रजिस्टर मेंटेन करना चाहिये और नियम 451 सिविल के तहत् जिन कर्मचारियों के वेतन से राशि काटी गई है उनसे पोस्ट आफिस के सेविंग बैंक में राशि जमा करना चाहिये और इस रजिस्टर में उसका इंदराज करना चाहिये।
16. नियम 680 म.प्र. नियम और आदेश आपराधिक के अनुसार नाजिर को आपराधिक मामलों में सौपी गई संपत्ति का इन्द्राज इस पंजी में करना चाहिये मूल्यवान वस्तुओं को पीठासीन अधिकारी की उपस्थिति में सील बंद पेकेट बनाकर कोषालय में जमा करना चाहिये और कोषालय का प्राप्ति क्रमांक रजिस्टर में लिखना चाहिये और जब भी संबंधित न्यायालय अपेक्षा करे उक्त पेकेट कोषालय से बुलवाना चाहिये, नियम 680 को कड़ाई का पालन करने से मूल्यवान वस्तुएं कोषालय में सुरक्षित रहती है।

  प्रोसेस संबंधी कर्तव्य

1. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह नियम 446 और 447 के अनुसार पर्याप्त मात्रा में आदेशिका वाहक या प्रोसेस सर्वर रखे ताकि आदेशिकाओं की तामिल अनिवार्य रूप से हो।
2. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह अन्य जिलों से प्राप्त होने वाले प्रोसेस का संबंधित पंजी में इंद्राज करे और भारत के किसी अन्य राज्य से यदि प्रोसेस प्राप्त होता है तब उसे लाल स्याही से अंकित किया जाये।
3. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह प्रोसेस के तामील के बारे में नियम 51 से नियम 103 का पालन संबंधित प्रोसेस सर्वर से करावे और यह देखे की इन नियमों के अनुसार आदेशिकाओं की तामिल हो रही है।
4. नियम 51 सिविल के अनुसार यथासंभव प्रत्येक प्रोसेस की तामील व्यक्तिगत रूप से होनी चाहिये और इस संबंध में नियम 51 का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये।
5. नियम 52 के अनुसार जिस व्यक्ति पर तामील की गई है उसकी पहचान किन गवाहों ने की इसका उल्लेख करने का प्रावधान है लेकिन यदि कोई पहचान करने वाला नहीं मिलता तो मात्र इस आधार पर तामील नहीं रोकना चाहिये और इस संबंध में नियम 52 सिविल के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिये।
6. नियम 53 के अनुसार संबंधित प्रोसेस की एक प्रति जिस व्यक्ति पर निर्वाह किया जा रहा है उसे देना चाहिये और दूसरी प्रति पर उसके हस्ताक्षर व अंगूठा लेना चाहिये लेने से इंकार करने की दशा में प्रोसेस मौखिक रूप से समझा देना चाहिये।
7. नियम 54 सिविल किसी व्यक्ति के अभिकर्ता पर तामील के बारे में है कोई व्यक्ति जिस स्थान पर कारोबार चलाता है वहां उपस्थिति व्यवस्थापक अभिकर्ता पर इस नियम के तहत् तामिल की जाती है जबकि नियम 55 अचल संपत्ति के वाद में उस संपत्ति के प्रभारी पर तामील के प्रावधान है।
8. नियम 56 में यदि संबंधित व्यक्ति अपने निवास पर नहीं मिलता है और उसका कोई अभिकर्ता भी नहीं है तब तामील करने के प्रावधान बताये है। इस नियम के अनुसार व्यक्तिगत तामील के हर संभव प्रयास करना चाहिये उसके बाद आदेश 5 नियम 17 के तहत् प्रतिस्थापित तामील की जाना चाहिये, नियम 56 के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिये प्रोसेस पर व्यक्तिगत तामील के प्रयास का उल्लेख किया जाना चाहिये जो किये गये हैं।
9. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह यह देखे कि जहां आदेश 5 नियम 15 सी.पी.सी. के तहत् कुटुम्ब के वयस्क सदस्य पर तामील की गई है वहां यह साबित होना चाहिये कि संबंधित व्यक्ति निवास पर अनुपस्थित था और उसके युक्तियुक्त समय में वापस लौटने की संभावना नहीं थी और निर्वाह के लिये उसका कोई अधिकृत प्रतिनिधि भी नहीं था और जिस व्यक्ति पर तामील की गई है वह परिवार का वयस्क सदस्य है और जिस व्यक्ति के नाम आदेशिका है उसके साथ वास्तव में रहता है। नाजिर का ध्यान नियम 57 सिविल एवं आदेश 5 नियम 15 सी.पी.सी. की ओर आकर्षित किया जाता है साथ ही इस नियम के प्रयोजन के लिये सेवक या सर्वेंट को परिवार का सदस्य नहीं माना गया है यह भी ध्यान रखा जावे।
10. जहां आदेश 5 नियम 14 सी.पी.सी. के तहत् अचल संपत्ति के मामले में उसके भार साधक या इंचार्ज पर तामील की गई है वहां यह साबित होना चाहिये कि संबंधित व्यक्ति पर व्यक्तिगत् तौर पर तामिल नहीं की जा सकती थी और उसका कोई अधिकृत प्रतिनिधि भी निर्वाह स्वीकार करने को नहीं था और जिस व्यक्ति पर तामील की गई है वह भूमि व अचल संपत्ति का भार साधक है। नियम 58 सिविल की ओर नाजिर की ओर आकर्षित किया जाता है।

11. नियम 59 सिविल के तहत् आदेश 5 नियम 20 सी.पी.सी. के तहत् तामील प्राप्त हुई है वहां यह साबित किया जाना चाहिये कि जिस भवन के दरवाजे अथवा आसानी से दिखने वाले भाग पर आदेशिका की प्रतिलिपि चिपकाई गई है वह ऐसा भवन है जिसमें जिस व्यक्ति के नाम आदेशिका है वह उसमें अंतिम बार निवास करता था या कारोबार करता था या लाभ के लिये कार्य करता था और आदेश 5 नियम 20 के प्रावधानों की ओर भी नाजिर
का ध्यान ऐसी तामील के बारे में आकर्षित किया जाता है।

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