Najir ke kartavya 3

Najir ke kartavya 3

12. यदि जिस व्यक्ति के नाम आदेशिका है उसका कोई निवास स्थान नहीं है या वह व्यक्ति मिल नहीं सकता है या उसकी मृत्यु हो चुकी है तब इन तथ्यों का उल्लेख प्रतिवेदन या रिपोर्ट में होना चाहिये और प्रतिवेदन में कम से कम दो व्यक्तियों के नाम और पते भी लिखना चाहिये जिनसे ऐसे तथ्य का ज्ञान हुआ है यदि संबंधित व्यक्ति ने उस स्थान पर निवास छोड़ दिया है तब उसके वर्तमान पते यदि उपलब्ध हो तो उसका उल्लेख और जिस साधन से वर्तमान पता लगा उसका भी उल्लेख प्रतिवेदन में करना चाहिये नियम 60 सिविल की ओर नाजिर का ध्यान आकर्षित किया जाता है।
13. जहां आदेश 29 नियम 2 सी.पी.सी. के तहत् निर्वाह किया गया है तब यह सिद्ध किया जाना चाहिये कि सूचना पत्र कंपनी या निगम के रजिस्टर्ड कार्यालय पर या ऐसा कार्यालय नहीं होने पर उस स्थान पर जहां कंपनी कारोबार करती है छोड़ा गया है डिलीवर किया गया है या संचालक, सचिव या अन्य मुख्य अधिकारी को संमन दिया गया है इस संबंध में नियम 63 सिविल की ओर नाजिर का ध्यान आकर्षित किया जाता है।
14. नियम 64 सिविल में फर्म के भागीदार या फर्म के कारोबार के नियंत्रक पर तामील करने के प्रावधान है इस संबंध में आदेश 30 नियम 3 में सी.पी.सीमें भी प्रावधान है जिनका पालन किया जाना चाहिये।
15. नियम 65 सिविल के तहत् जब आदेशिका का व्यक्तिगत् निर्वाह किया गया है तब आदेशिका के मूल प्रत के पीछे रसीद ली जाना चाहिये जिसमें आदेशिका की प्रतिलिपि वाद पत्र या अन्य दस्तावेज की प्रतिलिपि या कोई व्यय के लिये धन दिया गया है तो उसकी प्राप्ति या रसीद आदेशिका के मूल प्रत के पीछे ली जाना चाहिये यदि व्यक्ति अथवा भवन की पहचान किसी साक्षी या साक्षीगण ने की हो तब आदेशिका के मूल प्रत के पीछे उनके हस्ताक्षर या अंगूठा लेना चाहिये। नियम 65 में दिये गये इन सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिये।
16. नियम 67 सिविल में किसी लोक विभाग या रल्वे कपं नी के व्यक्ति पर कार्यालय प्रमुख के माध्यम से तामील के निर्देश दिये गये हैं जिनका पालन किया जाना चाहिये।
17. नियम 72 सिविल के तहत् आदेशिका वाहक को आदेशिका के निर्वाह या अनिर्वाह जैसे भी स्थिति हो उसके ठीक पश्चात् अपना प्रतिवेदन लिखना चाहिये और उस पर निर्वाह या अनिर्वाह का स्थान दिनांक और समय भी लिखना चाहिये और निर्धारित प्रारूप में अपना प्रतिवेदन नाजिर या नायब नाजिर को सौंपना चाहिये। नाजिर का यह कर्तव्य है कि नियम 72 की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करावे।
18. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह आदेशिका वाहकों या प्रोसेस सर्वर से प्रोसेस के निर्वाह संबंधी सिविल प्रक्रिया संहिता एवं म.प्र. सिविल न्यायालय नियम में दिये गये निर्देशों की पालना सुनिश्चित करावे और इस संबंध में नियम 81 सिविल पर ध्यान दे इस नियम के तहत् नाजिर का यह कर्तव्य है की प्रोसेस सर्वर को प्रोसेस के निर्वाह की विधि और उससे संबंधित नियमों को समझावे प्रोसेस तामिल के बाद कैसे वापस करना है इसकी विधि समझावे। नियम 81 के तहत् नाजिर का यह भी कर्तव्य की वह प्रोसेस सर्वर में आदेशिकाए उचित रूप से बांटे और यह देखे की प्रत्येक प्रोसेस सर्वर द्वारा तामील का औसत प्राप्त किया जाता है। नियम 81 के तहत् नाजिर का यह भी कर्तव्य है कि वह प्रोसेस सर्वर जब निर्वाह के बाद लौटते हैं तो उन्हें दिये गये आदेशिकाओं की सावधानी पूर्वक जांच करे और यह देखे की तामील में विफलता के क्या कारण थे और निर्वाह में विलंब, निर्वाह में उपेक्षा या दुराचार कर्तव्य के अनुचित पालन आदि के तथ्य यदि वह पाते है तो प्रभारी अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करे।
19. सभी नाजिर या नायब नाजिर प्रोसेस के विधिवत व नियमित निर्वाह के लिये और प्रोसेस की वापसी में उल्लेखित तथ्यों की वास्तविकता के बारे में संबंधित न्यायालय जहां से प्रोसेस जारी हुये है उसके प्रति नियम 82 सिविल के तहत् उत्तरदायी माने गये हैं अतः नाजिर या नायब नाजिर नियम 82 की सावधानी पूर्वक पालना सुनिश्चित करें।
20. नियम 83 सिविल में आदेशिका वाहकों के लिये सर्कल या मण्डल बनाने के निर्देश है  अतः नाजिर संबंधित जिले या तहसील का मानचित्र रखकर उसमें आने वाले गाॅंव को उचित रीति से मण्डलों या सर्कल में तामील की दृष्टि से, प्रभारी अधिकारी महोदय के आदेशानुसार और जिला अधिकारी की पूर्व अनुमति से, विभक्त करते हैं और प्रत्येक सर्कल की सूची नजारत में उचित स्थान पर लगावे ताकि उसे देखकर यह पता लग सके की तामील के लिये कितने सर्कल बनाये गये है और उनमें कौन-कौन से गाॅंव आते हैं। नाजिर या नायब नाजिर को एक त्रैमासिक विवरण या स्टेटमेंट बनाना चाहिये जिसमें प्रोसेस निर्वाह हेतु किसी मण्डल या सर्कल में किस दिनांक को भेजे जायेंगे और सर्कल या मण्डल से आदेशिका वाहक के लौटने का अनुमानित समय भी उस विवरण में बतलाना चाहिये इस विवरण की एक प्रतिलिपि प्रत्येक न्यायालय कक्ष में प्रदर्शित की जाना चाहिये ताकि संबंधित न्यायालय अपने प्रोसेस के लिये उसी अनुरूप प्रकरण में तिथियाॅं भी लगा सके ताकि प्रोसेस की तामील सुनिश्चित हो जावे। नाजिर या नायब नाजिर का ध्यान नियम 83 की ओर आकर्षित किया जावे और इस नियम का कड़ाई से पालन किया जावे।
21. नाजिर का ध्यान नियम 84 सिविल की ओर दिलाया जाता है जिसमें सर्कल के वापसी की दिनांक नियत करने संबंधी निर्देश हैं और वापसी दिनांक, यात्रा की दूरी, मौसम, स्थान की परिस्थितियाॅं आदि को ध्यान में रखकर नियत की जाना चाहिये।
22. नियम 85 सिविल के अनुसार आदेशिका वाहकों या प्रोसेस सर्वर में प्रोसेस या आदेशिकाए वितरित करने संबंधी निर्देश है जिनका नाजिर को कड़ाई से पालन करना चाहिये। नियम 86 और 87 सिविल में भी आदेशिका वाहकों को आदेशिकाए तामील के लिये देने और उनके लौटाने संबंधी निर्देश दिये गये है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये।
23. नियम 88 सिविल के अनुसार नाजिर या नायब नाजिर को निर्धारित प्रारूप में आदेशिका वाहकों द्वारा किये गये कार्यां का एक पंजी मेन्टेन करना चाहिये और इस पंजी में प्रत्येक आदेशिका वाहक द्वारा उसके सर्कल में किये गये कार्य या तामीलों का विवरण अंकित किया जाता है इस पंजी को देखने से ही यह पता लग जाता है कि किस आदेशिका वाहक ने कितने प्रोसेस तामील किये है कितने अदम तामील लौट आये हैं अतः इस पंजी को अत्यंत सावधानी से मेन्टेन करना चाहिये।
24. नियम 89 सिविल के अनुसार प्रोसेस सर्वर से आदेशिकाए प्राप्त होते ही नाजिर को उसे संबंधित न्यायालय को वापस करना चाहिये। नाजिर को इस नियम का पालन इस प्रकार करना चाहिये की संबंधित न्यायालय में नियत तिथि के एक दिन पूर्व ही तामील लौटा दी जावे।
25. नियम 90 सिविल के अनुसार नाजिर का यह कर्तव्य है कि आदेशिका वाहकों को आवश्यकता से अधिक समय के लिये मुख्यालय पर नहीं रोके और जब वे मुख्यालय पर हांे तब उन्हें प्रातः 10ः30 बजे कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश देवे और उन्हें अन्य विविध कार्य सौंपे। नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह यह देखे की आदेशिका वाहक सर्कल से वापस लौटते ही वर्क टिकिट और निर्वाह हेतु सौंपी गई सभी प्रोसेस, भोजन व्यय या यात्रा भत्ता की राशियाॅं वापस करें इस नियम का कड़ाई से पालन करवाया जाना चाहिये।

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