Najir Ke kartavya 4

Najir Ke kartavya 4

          नाजिर का यह कर्तव्य है कि आदेश्किा वाहक न्यायालयों में कार्य करते समय और आदेशिकाओं के निर्वाहन के कार्य में बाहर रहने पर भी सदैव आदेशिका वाहकों के प्रमाणिक बिल्ले या स्टेण्डर्ड बैचस् लगाकर कार्य करे। इस संबंध में नियम 90 सिविल के नोट की ओर नाजिर का ध्यान आकर्षित किया जाता है।

       म.प्र. सिविल न्यायालय नियम 1961 के नियम 72 के बाद आदेशिका वाहक और वापसी करने वाले अधिकारी के लिये कुछ मार्गदर्शन निर्देश दिये गये हैं जिनका पालन नाजिर को सुनिश्चित करवाना चाहिये ये निर्देश निम्न प्रकार से हैंः-

1. यदि आदेशिका वाहक आदेशिका में संबोधित व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानता हो तब इस तथ्य का उल्लेख किया जाना चाहिये और यदि आदेशिका वाहक उसे व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता है तब उसने संबोधित व्यक्ति की पहचान पर कैसे विश्वास किया इस उल्लेख करना चाहिये।
2. निर्वाह स्वीकार करने वाले व्यक्ति का नाम आदेशिका में दिये गये नाम से पूरी तरह समान होना चाहिये स्वीकृति के हस्ताक्षर और आदेशिका में वर्णित नाम में यदि भिन्नता हो तो इसका कारण लिखना चाहिये।
3. यदि निर्वाह आदेशिका में लिखित व्यक्ति के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति पर किया जाता है तब यह उल्लेख किया जाना चाहिये की वह व्यक्ति वयस्क है और आदेशिका में संबोधित व्यक्ति के साथ निवास करता है।
4. जब किसी प्रतिनिधि द्वारा आदेशिका का निर्वाह स्वीकार किया जाता है तब यह उल्लेख भी करना चाहिये कि वह निर्वाह स्वीकार करने के लिये विधिवत प्राधिकृत है।
5. जहां व्यक्ति आदेशिका लेने से इंकार करता है तो उसके इंकार करने का कारण यदि कोई हो और ऐसे साक्षी जिनके समक्ष आदेशिका लेने से इंकार किया गया है उनका नाम और पता उल्लेख करना चाहिये।
6. जहां पर्दानशीन स्त्री पर निर्वाह व्यक्तिगत संभव ना हो तब उसके परिवार के किसी उत्तरदायी पुरूष पर निर्वाह करने का प्रयास किया जाना चाहिये।
7. जहां संबोधित व्यक्ति के भवन पर आदेशिका की प्रति चिपका कर निर्वाह किया जाता है या चस्पा से तामील की जाती है तब भवन की जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम और पता और यह तथ्य की वह भवन को जानता था इसका उल्लेख करें साथ ही आदेशिका वाहक उस भवन पर किन-किन तारीखों पर गया साथ ही व्यक्तिगत निर्वाह के लिये किये गये प्रयास का उल्लेख करना चाहिये क्या संबोधित व्यक्ति निर्वाह टालने का प्रयास कर रहा था ऐसे कोई कारण हो तो लिखना चाहिये जब आदेशिका की प्रति भवन पर चिपकाई गई तब भवन खुला था या ताला लगा था संबोधित व्यक्ति भवन पर उपस्थित नहीं था तो उसके कहां जाने की जानकारी लगी उसका विवरण देना चाहिये और अन्य सभी परिस्थितियाॅं लिखना चाहिये जिनमें आदेशिका की प्रति चिपकाना आवश्यक हुआ।
8. यदि संबोधित व्यक्ति निर्वाह की पावती पर हस्ताक्षर करने से इंकार करता है तब इस तथ्य का उल्लेख करना चाहिये कि आदेशिका के प्रकार और विषय की सूचना उस व्यक्ति को दे दी गई है।
9. यदि अवयस्क पर व्यक्तिगत रूप से सूचना का निर्वाह किया जाता है तो उसकी लगभग उम्र जो दिखलाई देती है वह लिखना चाहिये।
10. प्रतिस्थापित तामील की दशा में आदेशिका संदर्भ और निर्वाह की पूरी व सही विधि का उल्लेख करना चाहिये।
11. जब तामील निगम, फर्म या स्वयं के अतिरिक्त अन्य किसी नाम से कारोबार करने वाले व्यक्ति के नाम से की जाती है तब इस बात का उल्लेख करना चाहिये की संबधित फर्म के मुख्य स्थान या रजिस्टर्ड कार्यालय पर निर्वाह किया गया है और जिस अधिकारी पर निर्वाह किया गया है उसका पद भी उल्लेखित करना चाहिये।
12. साक्षी की व्यय की राशि का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिये।
13. यदि आदेशिका वाहक भ्रमण के दौरान बीमार हो जाये या उसके नियंत्रण के बाहर का कोई कारण जैसे बाढ़ या कोई ऐसा ही अन्य कारण हो जिससे वह वर्क तिथि में नियत तारीख पर नहीं लौट सकता हो तब उसके द्वारा निपटाई जा चुकी आदेशिकाए बेरंग या पोस्ट पेयबल डाक से नाजिर या नायब नाजिर को तत्काल भेज देना चाहिये।
14. यदि आदेशिका वाहक वारंट के निष्पादन में कोई धन वसूल करता है तो उसे डिग्रीधारी या उसके प्रतिनिधि को सीधे भुगतान नहीं करना चाहिये बल्कि उस धन को नाजिर व नायब नाजिर को सिविल कोर्ट डिपाॅजिट में जमा करने हेतु सौंपना चाहिये। यदि आदेशिका वाहक ने 50 रूपये से अधिक का धन वारंट के तहत वसूला हो तो उसे मनीआर्डर से न्यायालय को भेजना चाहिये मनीआर्डर खर्च निर्णीत ऋणी उठायेगा लेकिन जहां डाकघर और मुख्यालय की दूरी बराबर है या डाकघर मुख्यालय से अधिक दूरी पर है तो उसे तुरंत मुख्यालय लौटना चाहिये और सारा धन नाजिर या नायब नाजिर को जमा करना चाहिये।
15. गिरफ्तारी वारंट की तामील के समय धारा 55 की उपधारा 1 तथा धारा 62 की उपधारा 2 सी.पी.सी. के निर्देशों का पालन होना चाहिये और निवास गृह का कोई भी बाहरी द्वार तभी तोड़कर खोलना चाहिये जब ऐसा निवास गृह निर्णीत ऋणी के आधिपत्य में हो और वह आदेशिका वाहक को वहां तब पहुंचने में मना करता हो या निवारित करता हो साथ ही सूर्यास्त के पश्चात् सूर्यादय के पूर्व निवास गृह में गिरफ्तारी के लिये प्रवेश नहीं करना चाहिये यदि उस कमरे में पर्दानशीन स्त्री हो तो उसे वहां से हटने के लिये समय देना चाहिये यदि संबंधित व्यक्ति वारंट में उल्लेखित राशि अदा कर दे तो उसे गिरफ्तार नहीं करना चाहिये।
16. नाजिर /नायब नाजिर का कर्तव्य है कि वे तामील के संबंध में उक्त निर्देशों तथा म.प्र. सिविल न्यायालय नियम 1961 में दिये गये उक्त निर्देशों से प्रोसेस सर्वर को अवगत करावे और इनकी पालना सुनिश्चित करें।

3. नक्शे मानचित्र व बजट भेजना

1. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह मासिक त्रैमासिक अर्द्ध वार्षिक और वार्षिक मानचित्र सही तरीके से तैयार करे और उन्हें समय पर भेजे।
2. बजट बनाना लेखापाल के साथ-साथ नाजिर का भी एक और महत्वपूर्ण कर्तव्य है जिसका पूर्ण गंभीरता से और सावधानी पूर्वक पालन करना चाहिये प्रत्येक शीर्ष में पूरे वर्ष में कितनी राशि लगेगी यह पिछले वर्षो के अनुभव के आधार पर आंकलन करना चाहिये किसी भी मद में न तो अत्यंत कम और न ही अत्यंत अधिक राशि मांगना चाहिये एक युक्तियुक्त राशि की मांग करना चाहिये।

4. फर्नीचर व अन्य स्टाक के बारे में

1. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह पूरे जिले के फर्नीचर का स्टाक रखे और किस न्यायालय को या किस अनुभाग को कौनसा फर्नीचर आबंटित किया गया है इसका स्पष्ट उल्लेख करे। वर्ष में एक बार स्टाक का भौतिक सत्यापन करे।
2. मरम्मत योग्य फर्नीचर की सूची बनावे और उसे प्रभारी अधिकारी के माध्यम से माननीय जिला जज महोदय के समक्ष रखे ताकि सभी फर्नीचर काम में लेने योग्य स्थिति में रहे।
3. नाजिर को पूरे जिले के न्यायालयों, अनुभागों आदि पर विचार करते हुये ऐसी सूची भी तैयार करना चाहिये कि कितना फर्नीचर किस न्यायालय और किस अनुभाग के लिये और चाहिये।
4. नाजिर को सभी न्यायालय और अनुभागों की अन्य आवश्यकताए जैसे पर्दे, टेबिल क्लाथ आदि के बारे में भी प्रत्येक तीन माह में संबंधित न्यायालय से या अनुभाग से संपर्क करके सूची बनाना चाहिये और ऐसी सूची पर प्रभारी अधिकारी के माध्यम से जिला जज महोदय के समक्ष रखना चाहिये।

5. न्यायालय भवन के संबंध में

1. नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह न्यायालय भवन की सुरक्षा और रखरखाव के बारे में आवश्यक व्यवस्थाए करे यदि न्यायालय भवन में कोई निर्माण या मरम्मत का तथ्य है तो उसे प्रभारी अधिकारी के ध्यान में लावे।
2. चैकीदार की समय≤ पर जांच करके उसका प्रतिवेदन प्रभारी अधिकारी महोदय को प्रस्तुत करे।
3. पूरे न्यायालय भवन की साफ-सफाई के बारे में एक कार्य योजना रखे और उस पर साप्ताहिक और मासिक लक्ष्य बनाकर सफाई का प्रबंध करे। न्यायालय भवन में उचित स्थानों पर डस्टबीन की व्यवस्था करावे।
4. न्यायालय के बगीचे की देखरेख के लिये उचित मात्रा में कर्मचारी लगावे।

6. अन्य कर्तव्य

1. नियम 448 सिविल एवं नियम 672 फौजदारी के तहत नाजिर, नायब नाजिर, सेल अमीन, आदेशिका वाहक, आदेशिका लेखक को एक प्रतिभू अनुबंध संपादित करना होता और जमानत देना होती है, नियम 449 सिविल के तहत् सेल अमीन को 500 रूपये की और आदेशिका वाहक को और आदेशिका लेखक को 100 रूपये की प्रतिभूति देना होती है।
2. नियम 450 के तहत् 110 रूपये और इससे अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी को नगद धन या राष्ट्रीय बचत पत्र के रूप में जमानत देना होती है, नियम 451 मंे वेतन से जमानत की राशि काटी जाने के प्रावधान है कर्मचारी एक साथ नगद धन भी जमा कर सकते है। नियम 452 सिविल के तहत् वेतन से काटी गई राशि के बारे में संबंधित कर्मचारी के नाम से पोस्ट आॅफिस में बचत खाता खुलवाने के निर्देश है और इस संबंध में नाजिर और नायब नाजिर पर इस नियम के तहत् ऐसे कर्मचारियों की सूची रखने के भी प्रावधान है। नाजिर /नायब नाजिर का कर्तव्य है कि इन नियमों को कड़ाई से पालन करे। नियम 453 में राष्ट्रीय बचत पत्र खरीदने के भी प्रावधान है।
3. नाजिर /नायब नाजिर का ध्यान नियम 454 से 457 सिविल की ओर दिलाया जाता है जिनमें कर्मचारीगण से नियम 448 के तहत जमानत लेने संबंधी निर्देश है जबकि नियम 458 में यदि संपत्ति की कोई हानि पाई जाती है तो उसकी सूचना तत्काल उच्च न्यायालय को भेजने के निर्देश है जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिये।
4. नियम 672 से 678 म.प्र. नियम एवं आदेश आपराधिक भी ऐसी प्रतिभूतियों के संबंध में है जिनका कि पालन किया जाना चाहिये।
5. नाजिर /नायब नाजिर का यह भी कर्तव्य है कि वह प्रभारी अधिकारी या जिला जज द्वारा समय≤ पर बतलाये गये अन्य कत्र्तव्यों का भी पालन करें।
6. न्यायालय भवन पर राष्ट्रीय ध्वज प्रातः लगवाना और सूर्यास्त के पूर्व उसे उतरवाने का ध्यान विशेष रूप से नाजिर /नायब नाजिर का रखना चाहिये राष्ट्रीय ध्वज सही स्थिति में फहराया जाये इसका भी ध्यान रखना चाहिये।
7. नाजिर /नायब नाजिर का यह कर्तव्य है कि किसी भी न्यायालय या पीठासीन अधिकारी के बँगला आॅफिस या किसी भी अनुभाग का कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यदि अवकाश पर जाता है तो उसकी वैकल्पिक व्यवस्था करना ताकि कार्य में व्यवधान न हो नाजिर /नायब नाजिर का कर्तव्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अवकाश लेखे को सही रूप से मेन्टेन करना भी है इस कर्तव्य का पालन इस प्रकार किया जाये कि संबंधित कर्मचारी के
अवकाश और कार्य व्यवस्था के बीच उचित तालमेल बना रहे।
8. नाजिर /नायब नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह न्यायालय भवन में पीने और अन्य उपयोग के पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से बनाये रखे और कठिनाई होने पर प्रभारी अधिकारी महोदय से मार्गदर्शन लेवे।
9. न्यायालय भवन की समय≤ पर रंगाई पुताई आदि पर ध्यान देना नाजिर का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है जिसका उसे सावधानी से पालन करना चाहिये।

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