Najir Ke Kartavya

Najir Ke Kartavya
नाजिर के कर्तव्य

 विभिन्न प्रकार के रजिस्टर मेन्टेन करना

                 नाजिर या नायब नाजिर के पद पर पदस्थ प्रत्येक कर्मचारी को निम्नलिखित रजिस्टर मेन्टेन करना होते हैं जिनका उल्लेख मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय नियम 1961 के नियम 459 में है जो निम्न प्रकार से है:-
क्रम संख्या रजिस्टर का नाम रिमार्क
1. व्यवहार न्यायालय के आदेशों के अधीन नाजिर को प्राप्त होने वाली या उससे होकर जाने वाली संपत्ति का रजिस्टर
2. व्यवहार न्यायालय के आदेशों के अलावा नाजिर को प्राप्त होने वाली या उसके हाथ से होकर जाने वाली संपत्ति का रजिस्टर
3. जनरल केश एकाउण्ट
4. कन्टीजेंट केश एकाउण्ट
5. वर्गीकरण या क्लासीफिकेशन रजिस्टर
6. वापस प्राप्त भोजन व्यय प्राप्ति का रजिस्टर
7. वापस प्राप्त भोजन व्यय के भुगतान का रजिस्टर
8. व्यवहार न्यायालय जमा की प्राप्तियों का रजिस्टर या सी.सी.डी. रिसीप्ट रजिस्टर
9. व्यवहार न्यायालय डिपाजिट का भुगतान का रजिस्टर
10. स्टेशन डाक बुक
11. डाक से भेजे गये प्रोसेस की डाक बुक
12. आदेशिका वाहकों के कार्य सूची या वर्ग टिकट की फाइल
13. सेल अमीन द्वारा आदेशिका वाहकों के कार्य की जांच का रजिस्टर
14. आदेशिका वाहकों द्वारा किये गये कार्य का रजिस्टर
15. सेल अमीनों द्वारा किये गये कार्य की रिपोर्ट
16. धन की पावतियों की पुस्तिका
17. प्रेषण सूची या रीमीटेन्स लिस्ट
18. नाजिर द्वारा कोषालय को भेजे गये धन की चालान बुक
19. नाजिर द्वारा दिये गये धन की पावतियों की डुप्लीकेट बुक
20. सिक्यूरिटी डिपाजिट रजिस्टर

2. नियम एवं आदेश आपराधिक के नियम 679 के अनुसार नाजिर को उक्त रजिस्टर के साथ-साथ निम्न रजिस्टर और मेन्टेन करना होते हैं:-
क्रम संख्या रजिस्टर का नाम रिमार्क
1. आपराधिक मामलों में नाजिर को सौंपी गयी संपत्ति की पंजी
2. आपराधिक मामलों में साक्षीगण के भोजन व्यय की पंजी
3. इस प्रकार नाजिर को उक्त नियमों में वर्णित उक्त रजिस्टर मेन्टेन करना होते हैं । नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह इन रजिस्टर की सूची अपनी शाखा के किसी सहज दृश्य या आसानी से दिखने वाले भाग पर लगा कर रखें ताकि यह पता लग सके कि नाजिर को कौन-कौन से रजिस्टर मेन्टेन करना होते हैं ।
4. नियम 460 सिविल के अनुसार व्यवहार न्यायालयों के आदेशों के अधीन नाजिर के हाथ में आने वाली संपत्ति की पंजी में केवल चल संपत्ति की प्रविष्टि करना चाहिए लेकिन डिक्री के निष्पादन में प्राप्त धन या संपत्ति का उल्लेख इस रजिस्टर में नहीं किया जाता है । ऐसी वस्तुयें जैसे कपड़े बर्तन जो डिक्रीधारी ने या उसके व्यय पर नाजिर को प्राप्त हुए हों उन्हें निर्णीत ऋणी के जेल से मुक्त होने पर इस रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाना चाहिए और बाद में डिक्रीधारी को नोटिस देकर बुलाकर उसे वापस करना चाहिए । नियम 460 में इस रजिस्टर को मेन्टेन करने के बारे में जो निर्देश दिये गये हैं उनका पालन किया जाना चाहिए और प्रत्येक तीन माह में अवशेष वस्तुओं की सूची तैयार कर प्रभारी अधिकारी के समक्ष रखना चाहिए और संबंधित न्यायालय में इन वस्तुओं के निराकरण के बारे में स्मरण पत्र लिखना चाहिए । मूल्‍यवान वस्तुओं जैसे जवाहरात वगैरह की प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रत्येक तीन माह में जांच करना चाहिए ।
5. नियम 461 सिविल के अनुसार व्यवहार न्यायालय के आदेशों के अलावा नाजिर के हाथों में आने वाली संपत्ति के रजिस्टर में पुराना फर्नीचर, लेखन सामग्री, संदूकें जो नाजिर के पास विक्रय के प्रयोजन से जमा की जाती हैं वह इस रजिस्टर में उल्लेखित की जाना चाहिए और ऐसी संपत्ति के विक्रय करने पर विक्रय से प्राप्त धन को कोषालयों में जमा करना चाहिए और पंजी के कालम नं. 4 से 6 में इस बावत् प्रविष्टी करना चाहिए ।
6. नियम 462 सिविल में सामान्य केश बुक या जनरल केश एकाउण्ट को मेन्टेन करने के निर्देश दिये गये हैं जिनका नाजिर को पालन करना चाहिए । इस रजिस्टर में विस्तारपूर्वक नाजिर द्वारा प्राप्त एवं भुगतान की गयी संपूर्ण राशि का विवरण बतलाया जाना चाहिए । ऐसी राशियाँ जिनके संबंध में पृथक से रजिस्टर रखा जाता है उनका प्रतिदिन का योग ही लिखना चाहिए । प्रत्येक न्यायालय के भोजन व्यय, वापस प्राप्त भोजन व्यय और शासकीय सेवकों के भोजन व्ययों के संबंध में संव्यवहारों को पृथक से दिखाया जाना चाहिए । कर्मचारीगण और भृत्यवर्ग को भुगतान किये गये वेतन पृथक से विस्तृत से बतलाया जाना चाहिए । राजस्व जमा में अंतरित होकर प्राप्त एवं सिविल न्यायालय जमा के रजिस्टर में लिये गये समस्त धन का सिविल न्यायालय जमा की प्राप्तियों के प्रतिदिन के योग में जमा और सम्मिलित किया जाना चाहिए । नामे की ओर सिविल न्यायालय जमा के भुगतान के संबंध में इन्द्राज के सिवाय कोषालय में बुक ट्रास्फर द्वारा जमा किये गये धन में एक अलग प्रविष्टि की जाना चाहिए । स्थायी अग्रिम और भुगतान हेतु प्राप्त रकमों जिनका भुगतान उचित समय में किया जाना है के अलावा अवशेष समस्त रकमें जो नाजिर के पास हों उन्हें प्रतिदिन कोषालयों में जमा कर दिया जाना चाहिए । असामान्य परिस्थितियों के अलावा मुख्यालय पर नाजिर के पास या बाह्य स्थानों पर नायब नाजिर के पास नगदी या रोकड़ क्रमशः एक हजार और सात सौ रूपये से अधिक उच्च न्यायालय की स्वीकृति के बिना नहीं होना चाहिए । असामान्य परिस्थितियों का उल्लेख वर्गीकरण रजिस्टर के रिमार्क काॅलम में किया जाना चाहिए । नाजिर का यह कर्तव्य है कि वह प्रतिदिन के हिसाब की जांच न्यायालय अधीक्षक या न्यायालय उपअधीक्षक द्वारा करवाये जहाॅं उक्त दोनों कर्मचारी पदस्थ न हों वहाॅं प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रतिदिन के हिसाब की जांच करवाना चाहिए । केश बुक की जमा की ओर से समस्त प्रविष्टि का मिलान पावती की पुस्तकें, व्यवहार न्यायालय जमा की प्राप्तियों का रजिस्टर, प्रोसेस और प्रोसेस फीस रजिस्टर, वापस हुए भोजन व्यय आदि की प्रविष्टियों से करवाना चाहिए । प्रतिमाह प्रभारी अधिकारी से इस रजिस्टर में नगदी बाकी को गिनकर उनसे प्रमाण पत्र लेना चाहिए । नियम 681 फौजदारी में भी इस रजिस्टर को मेन्टेन करने के बारे में निर्देश दिये गये हैं उनका भी नाजिर को पालन करना चाहिए ।
7. नियम 463 सिविल में कांटीजेंट केश एकाउण्ट को मेन्टेन करने के बारे में आवश्यक निर्देश दिये गये हैं जिनका नाजिर को पालन करना चाहिए साथ ही नियम 682 फौजदारी में इस रजिस्टर को मेन्टेन करने के बारे में निर्देश दिये गये हैं उनका भी पालन करना चाहिए । ऐसी प्रत्येक राशि जो कोषालय से एब्सट्ेक्स कांटीजेंट बिल द्वारा स्थायी अग्रिम की पूर्ति हेतु या अन्यथा निकाला जाता है और समस्त किये गये भुगतानों चाहे ऐसे भुगतान स्थायी अग्रिम से किये गये हों या विशेष खर्चों की पूर्ति के प्रयोजन से एब्सटे्क्ट कांटीजेंट बिल द्वारा निकाली गयी रकम से किये गये हों उनकी प्रविष्टि इस पंजी में की जाना चाहिए । कोई भी भुगतान नाजिर द्वारा जिला जज या न्यायालय अधीक्षक के हस्ताक्षरयुक्त भुगतान के आदेश के बिना नहीं किया जाना चाहिए । जहाॅं न्यायालय अधीक्षक का पद न हो वहाॅं भुगतान का आदेश प्रभारी अधिकारी महोदय के हस्ताक्षर से जारी होता है । नाजिर को प्रतिदिन इ़स रजिस्टर की जांच प्रभारी अधिकारी महोदय से भुगतान वाउचर को सामने रखकर करवाना चाहिए ।
8. वर्गीकरण रजिस्टर या क्लासीफिकेशन रजिस्टर को मेन्टेन के बारे में नियम 464 सिविल एवं नियम 683 फौजदारी में निर्देश दिये हैं जिनका पालन नाजिर को करना चाहिए । इस रजिस्टर में प्रत्येक मद की रोकड़ पता लग सकती है इस रजिस्टर की भी जांच प्रतिदिन नाजिर को न्यायालय अधीक्षक या न्यायालय उपअधीक्षक से करवाना चाहिए ।
9. वापस प्राप्त भोजन व्यय की प्राप्तियों और भुगतान के रजिस्टर को मेन्टेन के बारे में नियम 465 सिविल में निर्देश दिये गये हैं जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए । नियम 465 में व्यवहार मामलों के साक्षियों के भोजन व्यय के संबंध में निर्देश हैं जबकि नियम 684 फौजदारी में दाण्डिक मामलों के गवाह के संबंध में निर्देश हैं जिनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए इन नियमों में इस रजिस्टर को मेन्टेन के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला गया है जिनको ध्यान में रखना चाहिए और ये प्रयास करना चाहिए कि प्रत्येक मामले में गवाह को उसका व्यय प्राप्त हो और गवाह के न आने पर जिस पक्ष में वह व्यय जमा कराया है उसे वापस हो ।

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