nyayik karmchari Criminal Reader ke kartavya 2

nyayik karmchari Criminal Reader ke kartavya

सेशन न्यायालय की पंजीयाॅं

  सेशन विचारण प्रकरणों का रजिस्टर
यह रजिस्टर सेशन न्यायालय के क्रिमिनल रीडर द्वारा मेंटेन किया जाता है जिस संबंध में नियम 574 की ओर ऐसे क्रिमिनल रीडर का ध्यान आकर्षित किया जाता है। अतिरिक्त सेशन न्यायालय के लिये पृथक से कोई पंजी नहीं होती है। सेशन न्यायालय में ही सभी सत्र प्रकरणों का पंजीयन किया जाता है। अतिरिक्त सेशन न्यायालय के क्रिमिनल रीडर को प्रकरण के निराकरण के बाद सेशन न्यायालय में जाकर संबंधित काॅलम की पूर्ति करना चाहिये उसके बाद ही प्रकरण रिकार्ड रूम में जमा करवाना चाहिये।

11. अपीलों की पंजी

नियम 585 और 586 को ध्यान में रखते हुये अपीलों की पंजी मेंटेन करना चाहिये जिसमें प्रत्येक अपील को पृथक नंबर देने के प्रावधान है। यह पंजी सेशन न्यायालय में रखी जाती है अतिरिक्त सेशन न्यायालय के लिये पृथक से कोई पंजी नहीं होती है अतः अतिरिक्त सेशन न्यायालय के क्रिमिनल रीडर को अपील के निराकरण के बाद सेशन न्यायालय में जाकर संबंधित काॅलम की पूर्ति करना चाहिये उसके बाद ही प्रकरण रिकार्ड में जमा करवाना चाहिये।

12. पुनरीक्षण की पंजी

नियम 587 के अनुसार सेशन न्यायालय में एक पुनरीक्षण पंजी रखी जाती है अतिरिक्त सेशन न्यायालय के लिये पृथक से कोई पंजी नहीं होती है अतः अतिरिक्त सेशन न्यायालय के क्रिमिनल रीडर को पुनरीक्षण के निराकरण के बाद सेशन न्यायालय में जाकर संबंधित काॅलम की पूर्ति करना चाहिये उसके बाद ही प्रकरण रिकार्ड में जमा करवाना चाहिये। क्रिमिनल रीडर /निष्पादन लिपिक द्वारा मेंटेन किये जाने वाले रजिस्टर का उल्लेख नियम 369 में है उसकी सूची उन्हें अपनी शाखा में किसी सहज दृश्य या आसानी से देखे जाने वाले स्थान पर लगाना चाहिये ताकि सूची देखते ही यह पता लग सके की क्रिमिनल रीडर को कौन-कौन से रजिस्टर मेंटेन करना होते है सूची इस प्रकार है:-

स. संख्या पंजी का नाम जिस न्यायालय द्वारा उसे रखा जाता उसका नाम

1. प्रारंभिक मामलों के रजिस्टर (सेशन न्यायालयों को छोड़कर) प्रारंभिक अधिकारिता
का प्रयोग करने वाले समस्त न्यायालय
2. सेशन विचारणों के रजिस्टर सेशन न्यायालय
3. विविध कार्यवाहियों के रजिस्टर समस्त न्यायालय
4. जुर्माना रजिस्टर अ, ब समस्त न्यायालय
5. छोड़े गए पागलों के रजिस्टर समस्त न्यायालय
6. अपीलों के रजिस्टर अपीलीय शक्ति का प्रयोग करने वाले समस्त न्यायालय
7. रिव्हीजन (पुनरीक्षणों) रजिस्टर पुनरीक्षण की शक्ति का प्रयोग करने वाले समस्त न्यायालय
8. धन की पावतियों की पुस्तक समस्त न्यायालय
9. प्रकरणों की सूची समस्त न्यायालय
10. निरीक्षण पुस्तिका समस्त न्यायालय
11. आदेशिका शुल्क एवं खुराक खर्च रजिस्टर समस्त न्यायालय
12. न्यायिक दैनंदिनी न्यायिक मजिस्टेªटी की न्यायालय

2. प्रकरणों की पत्रावलियों को नियमानुसार तैयार व व्यवस्थित करना

क्रिमिनल रीडर का यह एक महत्वपूर्ण कत्र्तव्य है की वह पत्रावलियों को और अभिलेख को नियमानुसार सुरक्षित और व्यवस्थित रखे क्रिमिनल रीडर का ध्यान मध्यप्रदेश नियम एवं आदेश आपराधिक के नियम 441 से 475 की ओर आकर्षित किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के अभिलेखों की विचारण के दौरान तैयारी और उनकी व्यवस्था के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला गया है कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान निम्नानुसार है:-

सेशन न्यायालय में विचारण के अभिलेख

1. सेशन न्यायालय में प्रत्येक विचारण में अभिलेख दो फाइलों या नस्तियों में रखा जायेगा जो कि नस्ती ए और नस्ती बी से चिन्हित और नामांकित होगी जैसा का नियम 441 में व्यवस्था है।

2. नियम 442 के अनुसार नस्ती ’’ए’’ में निम्नलिखित प्रपत्र मुख्य रूप से रखे जाते हैः-

1 मुख्य पृष्ठ या टाइटिल पेज।
2 अनुक्रमाणिका या टेबल आफ कंटेन्ट।
3 आदेश पत्र या आडर सीट।
4 आरोप जिसके अधीन विचारण किया गया और इस बात का अभिलेख की आरोप पढ़कर सुनाया या समझाया गया तथा अभियुक्त का अभिवाक् आरोप पत्र या परिवाद पत्र आदि जिनसे कार्यवाही प्रारंभ हुई।
5 अभियोजन के साक्ष्य में स्वीकृत या एडमिट दस्तावेजों की सूची और दस्तावेज।
6 अभियोजन के साक्षीगण की साक्ष्य या डिपोजिशन।
7 अभियुक्त का सेशन न्यायालय में किया गया परीक्षण और उसके द्वारा दिया गया लिखित कथन
8 प्रतिरक्षा की साक्ष्य में स्वीकृत दस्तावेजों की सूची और दस्तावेज।
9 प्रतिरक्षा के साक्षियों की साक्ष्य या डिपोजिशन।
10 निर्णय
11 अपील या पुनरीक्षण न्यायालय के निर्णय अथवा आदेश की प्रतिलिपि ।
12 सजा वारंट की कार्बन प्रति।
13 दंडादेश के निष्पादन के बाद लौटा वारंट एवं अर्थदंड वसूली की समस्त कार्यवाही।

3. नियम 443 के अनुसार नस्ती ’’बी’’ में एक मुख्य पृष्ठ या टायटिल पेज होगा वे सब दस्तावेज होंगे जो नस्ती ’’ए’’ में उपर उल्लेखित
नहीं है।

मजिस्टेट के न्यायालयों के अभिलेख

ए. वारंट मामलों में

4. मजिस्टेªट द्वारा विचारित वारंट मामले में अभिलेख दो फाइल या नस्तीयों में रहेगा जिन्हें नस्ती ’’ए’’ और नस्ती ’’बी’’ से चिन्हित और नामांकित किया जायेगा इस संबंध में नियम 444 में प्रावधान है।

5. नियम 445 के अनुसार नस्ती ’’ए’’ में निम्नलिखित प्रपत्र निम्न क्रम में रखे जावेगे:-

1 मुख्य पृष्ठ या टाइटिल पेज।
2 अनुक्रमाणिका या टेबल आॅफ कंटेन्ट।
3 आदेश पत्र या आडर सीट।
4 आरोप जिसके अधीन विचारण किया गया और इस बात का अभिलेख की आरोप पढ़कर सुनाया या समझाया गया तथा अभियुक्त का अभिवाक्
5 आरोप पत्र या परिवाद पत्र आदि जिनसे कार्यवाही प्रारंभ हुई।
6 अभियोजन के साक्ष्य में स्वीकृत या एडमिट दस्तावेजों की सूची और दस्तावेज।
7 अभियोजन के साक्षीगण की साक्ष्य या डिपोजिशन।
8 अभियुक्त का सेशन न्यायालय में किया गया परीक्षण और उसके द्वारा दिया गया लिखित कथन
9 प्रतिरक्षा की साक्ष्य में स्वीकृत दस्तावेजों की सूची और दस्तावेज।
10 प्रतिरक्षा के साक्षियों की साक्ष्य या डिपोजिशन।
11 समंन या समझौता आवेदन यदि उसके द्वारा दोषमुक्ति की गई हो।
12 निर्णय, निष्कर्ष एवं दंडादेश।
13 धारा 106 दं.प्र.सं. के अधीन परिशांति कायम रखने के लिये बंद पत्र या परीविक्षा के जमानत मुचलके।
14 अपील एवं पुनरीक्षण न्यायालय के निर्णय/आदेश की प्रति।
15 धारा 250 दं.प्र.सं. के अधीन की गई कार्यवाही।
16 सजा वारंट की कार्बन प्रति।
17 सजावारंट जो दंडादेश के निष्पादन के लौटकर आया हो या अर्थदंड वसूली की पूरी कार्यवाही।

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