Process Writer ke kartavya / Board Peon ke kartavya

 

Process Writer ke kartavya
आदेशिका लेखक या प्रोसेस राईटर के कर्तव्य

           प्रत्येक सिविल न्यायालय में एक आदेशिका लेखक का पद रहता है कुछ स्थानों पर एक ही कर्मचारी एक से अधिक न्यायालय का कार्य भी देखते हैं। आदेशिका लेखक के कर्तव्य निम्नानुसार हैः-

  1. न्यायालय के आदेशानुसार आदेशिकाएं समय पर और नियमानुसार तैयार करना और उन्हें समय पर ही डिस्पेच करना । इसके लिए आदेशिका लेखक को मूल पत्रावली से आदेश देख लेना चाहिए और संबंधित पक्षकार के नाम और विवरण मूल पत्रावली से ही आदेशिका में अंकित करना चाहिए। जब तक कि किसी नवीन पते को देने का निर्देश हो और उस निर्देश के अनुसार यदि नवीन पता दिया हो तब तलबाने से या प्रोसेस से नवीन पता लिखना चाहिए।
  1. आदेशिका लेखक को आदेशिका जारी करते समय म0प्र0 सिविल न्यायालय नियम 1961, जिसे आगे नियम कहा जायेगा के नियम 42 के निर्देशों का पालन करना चाहिए जिनमें आदेशिकाएं और सभी प्रोसेस पूर्ण सावधानी से जारी करने के निर्देश है साथ ही आदेशिका में उसे जारी करने वाले अधिकारी का नाम विवरण स्थान और जिले का उल्लेख करने का निर्देश है।
  2. नियम 42 के अनुसार आदेशिकाओं के साथ पठनीय वाद पत्र की प्रतिलिपियाँ संलग्न करने के निर्देश है जिनका पालन किया जाना चाहिए।
  3. नियम 43 के अनुसार आदेशिकाओं में उपस्थिति का समय अंकित करने के निर्देश है जो सामान्यतः प्रातः 11.00 बजे का अंकित किया जाना चाहिए जब तक कि न्यायालय ने अन्य निर्देश न दिया हो साथ ही आदेशिकाओं मे न्यायालय की मोहर और गोल मोहर लगानी चाहिए।
  4. नियम 45 के अनुसार आदेशिकाओं में संबंधित व्यक्ति का नाम पिता का नाम व्यवसाय पूर्ण पता आदि का पूर्ण विविरण अंकित करने का निर्देश है। आदेशिका लेखक का ध्यान नियम 45 की ओर आकर्षित किया जाता है जिसमें बडे़ स्थानों पर मकान नंबर नगर पालिका वार्ड मोहल्ला आदि स्पष्ट उल्लेखित करने के निर्देश है।
  5. नियम 44 के अनुसार आदेशिकाएं न्यायालय की भाषा में जारी की जाना चाहिए। परन्तु जब आदेशिकाएं ऐसे न्यायालय को निर्वाह हेतु भेजी जाती है जहां कि भिन्न भाषा हो तब आदेशिका का हिन्दी अनुवाद प्रमाणित करके संलग्न करना चाहिए।
  6. नियम 46 के अनुसार आदेशिका शुल्क कोर्ट फीस स्टाम्प के रूप मे दी जाना चाहिए नकद धन के रूप में नहीं दी जाना चाहिए। यह स्टाम्प कागज पर लिखे ज्ञापन पर चिपका कर प्रस्तुत किया जाता है। जिसमें न्यायालय का नाम, प्रकरण क्रमांक, पक्षकारों के नाम आदि का उल्लेख रहता है। आदेशिका लेखक का यह कर्तव्य है कि वह उक्त ज्ञापन की दूसरी प्रति पर आदेशिका शुल्क प्राप्त होने की पावती प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को देवें।
  7. आदेशिका लेखक का ध्यान नियम 42 से 48 की ओर आकर्षित कराया जाता है जिससे उसका पालन आदेशिका जारी करने में करना चाहिए।
  8. आदेशिका लेखक का कर्तव्य है कि नियम 377 के अनुसार आदेशिका शुल्क और आदेशिका का रजिस्टर मेन्टेन करे और नियम 378 के अनुसार मनीआर्डर से प्राप्त डाईट मनी रजिस्टर भी मेन्टेन करें। साथ ही नियम 397 के अनुसार धन प्राप्ति पुस्तक को मेन्टेन करे और इन नियम में बतलाये अनुसार प्राप्त की गई राशि का प्रतिदिन उल्लेख करें और उस पर पीठासीन अधिकारी महोदय के हस्ताक्षर करावे।
  9. आदेशिका लेखक का कर्तव्य है कि वह नियम 377 से 389 तक उसके द्वारा मेन्टेन किये गये रजिस्टर को कार्यालय अधीक्षक या कार्यालय उप-अधीक्षक के समक्ष जांच के लिए रखें।
  10. आदेशिका लेखक का यह कर्तव्य है कि वह म0प्र0 नियम एवं आदेश आपराधिक के नियम 592 के अनुसार आदेशिका शुल्क एवं डाईट मनी रजिस्टर मेन्टेन करे जिसमें दाण्डिक प्रकरण संबंधी प्रोसेस मे डाईट मनी का उल्लेख करे ।
  11. आदेशिका लेखक का यह कर्तव्य है कि वह नियम 467 के अनुसार डाक द्वारा भेजी गई आदेशिकाओं हेतु डाक बुक मेन्टेन करे।
  12. आदेशिका लेखक का यह कर्तव्य है कि वह निर्वाहित या अनिर्वाहित प्राप्त आदेशिकाओं को तारीख व एक पेड बनाकर रखें और एक दिन पूर्व ही प्रस्तुतकार के मदद से उन्हें संबंधित प्रकरण में संलग्न कर दे।
  13. आदेशिका लेखक का यह कर्तव्य है कि वह जो भी प्रोसेस प्राप्त करें उसकी पावती अवश्य प्रस्तुत करने वाले पक्षकार को उक्त नियम 46 के अनुसार देवें ताकि प्रोसेस पेश किया गया या नहीं यह प्रश्न उत्पन्न होने पर संबंधित पक्ष से उक्त रसीद की मांग की जा सकें और यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में प्रोसेस दिया गया था या नहीं।
  14. यदि आदेशिका लेखक के पास एक से अधिक न्यायालय का कार्य है तो उसे प्रत्येक न्यायालय में उसके बैठने के समय के बारे में उसके पदस्थान पर एक छोटा बोर्ड लगा देना चाहिए ताकि प्रोसेस प्रस्तुत करने वाले पक्षकारों/अभिभाषकों को असुविधा न हो साथ ही यदि वह एक न्यायालय में बैठे हो और दूसरे न्यायालय का प्रोसेस आ भी जाये तो यथा संभव उसे लेना चाहिए ताकि पक्षकारों को अनावश्यक असुविधा न हो।
बोर्ड प्यून के  कर्तव्य

प्रत्येक न्यायालय में एक बोर्ड प्यून का पद होता है जिसके मुख्य  कर्तव्य निम्नानुसार है:-

  1. पीठासीन अधिकार/सिविल रीडर/क्रिमिनल रीडर/निष्पादन लिपिक के निर्देश पर पक्षकारों/साक्षियों की पुकार लगाना।
  1. अन्य न्यायालयों में या कार्यालयों में डाक जमा करवाना।
  2. फर्राश से न्यायालय की सफाई करवाना या स्वयं सफाई करना।
  3. स्वीपर से न्यायालय टायलेट साफ करवाना।
  1. बोर्ड प्यून का यह कर्तव्य है कि वह बोर्ड को न्यायाधीश महोदय के चेम्बर को और न्यायालय कक्ष को साफ-सुथरा रखने में उक्त कर्मचारियों के साथ सहयोग बनाकर कार्य करें।

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