Abhilekhpal ya Record Keeper ke kartavya 4

अभिलेखापाल या रिकार्ड कीपर के कर्तव्य 4
Abhilekhpal ya Record Keeper ke kartavya 4

नियम 504 फौजदारी के अनुसार द्वितीय भाग अर्थात् 50 वर्ष से अन्य अवधि के लिए सुरक्षित की जाने वाली पंजीयों के भाग को पुनः चार भागों मे विभक्त करना चाहिएः-

ऐसी पंजीया जो 14 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाना है।

ऐसी पंजीया जो 6 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाना है।

ऐसी पंजीया जो 3 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाना है।

ऐसी पंजीया जो 1 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाना है।

नियम 505 फौजदारी में प्रथम और द्वितीय भाग के विभाजन के बारे मे निर्देश दिये गये है और उनकी जिल्द बनाने के बारे में निर्देश दिये गये है ऐसे ही निर्देश 506, 507 और 508 में भी दिये गये है जो पंजीयों की पंजी को मेन्टेन करने के बारे में है जिनका पालन किया जाना चाहिए।

नियम 510 में उल्लेखित पंजीया रिकार्ड रूम में जमा होती है अतः इस नियम को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

नियम 511 से 517 फौजदारी के अनुसार सेशन न्यायालय या अपर सेशन न्यायालय के रिकार्ड जमा होने संबंधित निर्देश है जो उक्त नियमों के अनुरूप ही हो और इन्हें भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अभिलेखो का नष्ट किया जाना

अध्याय 20 के नियम 518 से 531 अभिलेख के नष्टीकरण के बारे में ही जिन्हे रिकार्ड कीपर द्वारा ध्यान में रखा जाना चाहिए और उन्ही नियमों के अनुसार अभिलेख का विनिष्टिकरण करना चाहिए ताकि रिकार्ड रूम में नये रिकार्ड के लिए स्थान बनता रहे व विनिष्टिकरण का कार्य भी लंबित न रहे विनिष्टिकरण का कार्य प्रभारी अधिकारी महोदय के उपस्थिति में और उनके निर्देशों के अनुरूप ही करना चाहिए। विनिष्टिकरण के पूर्व रिकार्ड की बारीकी से छानबीन कर लेना चाहिए यह भी देखलेना चाहिए जो भाग या पार्ट वे नष्ट कर रहे है उसमें कही त्रुटिवश अन्य भाग का प्रपत्र तो नहीं लगा है नियम 441 से नियम 475 में किसी भी दाण्डिक अभिलेख में किस भाग या फाईल में कौन से प्रपत्र रखे जाते है इसका स्पष्ट उल्ल्ख किया गया है जिसे विनिष्टिकरण के समय ध्यान रखा जावे क्योंकि प्रपत्र को किसी फाइल या भाग में रखने में मानवीय त्रुटि संभावित होती है अतः विनिष्टिकरण के पूर्व रिकार्ड कीपर को अत्यंत सावधानी से कार्यकरना चाहिए।

नियम 518 फौजदारी के अनुसार नस्ती बी या फाइल बी के प्रपत्र 6 माह की अवधि के पश्चात् नष्ट किये जाते है अवधि की गणना अंतिम आदेश से की जाती है जो प्रारंभिक न्यायालय का अपील या पुनरीक्षण न्यायालय का होता है जो भी अंतिम आदेश हो वहां से अवधि की गणना करना चाहिए । नियम 518 में विभिन्न प्रकार के मामलों के अभिलेख के विनिष्टिकरण की अवधि दी गई है जिसे ध्यान मे रखना चाहिए।

दाण्डादेश के समाप्ति के पूर्व या कारावास से दंण्डित व्यक्ति के मृत्यु के पूर्व, दोनों में से जो भी पहले हो तब तक नस्ती ए या फाइल ए नष्ट नहीं की जाती है।

नियम 520 को मानसिक रूप विकृत्तचित्त व्यक्तियों और अन्य व्यक्तियों जिनका की उल्लेख इस नियम में किया गया है उनके मामले नस्ती ए का नष्ट करने में ध्यान मे रखा जावे।

नियम 521 फौजदारी को बाल विवाह निषेध अधिनियम के मामले जिनमें की निषेधाज्ञा दी गई है उनकी नस्ती ए का नष्ट करते समय ध्यान में रखा जावे।

25 नियम 522 फौजदारी के प्रावधान की कड़ाई से पालना की जावे जिसमें भा0दं0सं0 के अध्याय 12 या 17 के मामले अर्थात् ‘‘सिक्को और सरकारी स्टाम्पों से संबंधित अपराध के विषय म धारा 230 से 263 ए भा0द0 स0 तथा ‘‘संपत्ति के विरूध अपराधों के विषय में‘‘ धारा 378 भा0दं.सं0 धारा 462 भा0दं0सं0 के मामले जिनमें की तीन वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध हो तब टाइटल पेज आरोप पत्र निर्णय दण्डादेश अपील

या पुनरीक्षण न्यायालय के आदेश तब तक सुरक्षित रखे जावेगें जब तक की दोषि व्यक्ति की मृत्यु हो जाना ज्ञात न हो जावे। यदि किसी मामले मं कोई अभियुक्त पकडा न जा सका है या फरार है उसकी पंजी ए तब तक सुरक्षित रखी जावेगी जब तक उसकी मृत्यु हो जाना ज्ञात न हो जावे या उसक विरूद्ध कार्यवाही करने का संबंधित न्यायालय का आगे आशय न बचा हो इस संबंध में नियम 522 के उपनियम 2 की कडाई से पालना की जावे संबंधित पत्रावली के मुख्य पृष्ठ पर लाल स्याही से आरोपी फरार ऐसा लिख लिया जाना चाहिए ताकि त्रुटिवश अभिलेख विनिष्टिकरण में न आ जावे। धारा 125 दं0प्र0सं0, 1973 के मामलों की नस्ती ए जिनमें की भरण पोषण का आदेश दीया गया है तब तक सुरक्षित रखी जावेगी जब तक की प्रार्थी की या जिसके पक्ष में भरण पोषण का आदेश दिया गया है उसकी मृत्यु होना ज्ञात न हो जावे या दायित्व समाप्त न हो जावे या कोई अवशेष वसली आगे भी नही होना हो इस संबंध में निमय 522 के उपनियम 3 का कडाई से पालन किया जावे।

नियम 523 फौजदारी के अनुसार नियम 520 और 522 फौजदारी में उल्लेखित मामले को अंतिम आदेश की तारीख से 20 वर्ष के बाद परीक्षण करने के प्रावधान है अतः रिकार्ड कीपर का यह कर्तव्य है कि वह इन मामलों की अंतिम आदेश के 20 वर्ष पश्चात् सूची बनाकर प्रभारी अधिकारी महोदय के माध्यम से सेशन जज महोदय के समक्ष रखे और उचित आदेश प्राप्त करे।

27 नियम 524 फौजदारी निरस्त किये गये परिवाद या मिस्लेनियस नान ज्यूडिशियल केस आदि के विनिष्टिकरण के बारे में है जिनको ध्यान मे रं खा जावे।

नियम 526 फौजदारी के अनुसार अभिलेख के विनिष्टिकरण के पूर्व उस अभिलेख में यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत कोई दस्तावेज वापस किये जाने योग्य हो तो उसे सूचना देने के प्रावधान है जिनका पालन किया जाना चाहिए।

नियम 527 फौजदारी के अनुसार फाइल ए और बी के विनिष्टिकरण के बारे में है जबकि नियम 528 फौजदारी रजिस्टर और अन्य कागजात के विनिष्टिकरण के बारे में है जिन्हें ध्यान मे रखा जावे और नियम 528 में रजिस्टर की सूची और उन्हें कब तब सुरक्षित रखना है वह अवधि भी दी गई है उन्हें ध्यान मे रं खा जावे और उन्हीं के अनुरूप रजिस्टर व पंजीयों  का विनिष्टिकरण किया जावे।

निमय 529 फौजदारी विनिष्टिकरण हेतु अभिलेख निकालने और उचित स्थान पर रिकार्ड कीपर द्वारा हस्ताक्षर करने के बारे में है जबकि नियम 530 फौजदारी अभिलेखों पर विनिष्टिकरण के बारे में है जिन्हें ध्यान में रखा जावे और कडाई से पालन किया जावे।

नियम 531 फौजदारी सेशन न्यायालय और अपर सेशन न्यायालय के रिकार्ड के संबंध में है जिनपर उक्त प्रावधान लागू होते है ।

अभिलेखों का जनता द्वारा निरीक्षण

निमय 532 फौजदारी किसी अभिभाषक द्वारा या प्रकरण के पक्षकार या उसके मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि द्वारा अभिलेख के निरीक्षण के बारे में है जिसे रिकार्ड कीपर का ध्यान रखना चाहिए।

रिकार्ड कीपर को एक निरीक्षण पुस्तिका मेन्टेन करना होती है जिसमें अभिलेख के निरीक्षण के बारे में औसत विवरण दर्ज किये जाते है।

निमय 534 लंबित प्रकरणों के अभिलेख के बारे में भी है इस नियम में अनुसार रिकार्ड कीपर को निराकृत प्रकरणों का निरीक्षण स्वंय की उपस्थिति में करवाना चाहिए। नियम 536 में निरीक्षण शुल्क के बारे में प्रावधान हैनिरीक्षण के प्रावधान है।

35 नियम 539 के अनुसार निरीक्षण शुल्क कोर्ट फीस के रूप में लिया जाता है जबकि नियम 540 में शासकीय मामलों में निरीक्षण शुल्क से छुट आदि के प्रावधान है। निमय 541 फौजदारी के अनुसार निरीक्षण के समय पेन्सिल का प्रयोग किया जा सकता है स्याही वाहे पेन का उपयोग नहीं किया जा सकता मूल अभिलेख पर कोई चिन्ह नहीं बनाया जा सकता नियम 541 से 544 फौजदारी का इस संबंध में कडाई से पालन किया जावे।

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