sarakaaree karmachaariyon chal ya achal sampatti

यह सामान्य धारणा है कि कुछ शासकीय सेवक अपनी ज्ञाता के अनुपात से अधिक संपत्ति अर्जित कर लेते हैं जोकि असंतोष धनक है जिससे कारण यह होता है कि शासकीय सेवकों के लिए बाहरी लोग यह सोचते हैं कि इनमें बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार हो गया है तभी है इतनी ज्यादा इनकम या पैसा कमा रहे हैं जबकि मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 19 में प्रावधान है कि sarakaaree karmachaariyon को प्रतिवर्ष अचल संपत्ति के संबंध में पूर्ण विवरण प्रस्तुत करना चाहिए परंतु शासकीय सेवकों को जो वरिष्ठ अधिकारी हैं उनको छोड़कर अधिकतर शासकीय सेवक इन विवरणों को नहीं भरते हैं और ना ही इनको नियमित रूप से प्राप्त करने कोई सिस्टम बना है इन्हीं स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ निर्णय लिए गए हैं कि उपरोक्त नियम उन्नीस चार के अनुसरण में राज्य शासन यह निर्देश देता है कि अध्यापक गण लिपिक सेवाओं में संलग्न तृतीय श्रेणी के कर्मचारी और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को छोड़कर समस्त शासकीय सेवक उनके द्वारा 31 मार्च 1983 को धारित अचल संपत्ति के संबंध में एक विवरण प्रस्तुत करेंगे और उक्त नियम के अधीन तैयार किया गया विशेष विवरण का पत्रक संलग्न है या विवरण दिनांक 31 दिसंबर 1983 तक निश्चित रूप से कर्मचारियों द्वारा उनके प्रस्तुत किया जाएगा पहला जिला  एवं इससे निम्न स्तर के कार्यालयों स्थापना में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा विवरण अपने कार्यालय स्थापना प्रमुख को प्रस्तुत किया जाएगा ताकि वह यह सुनिश्चित कर सकेगी प्रस्तुत विवरण से लेकर जिलाध्यक्ष को निर्धारित तिथि के पूर्व प्राप्त हो जाएं दूसरा संभागीय स्तर के कार्यालयों स्थापना ओं में कार्यरत sarakaaree karmachaari अपने विवरण कार्यालय स्थापना प्रमुख के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे जो कि आयुक्त को निर्धारित तिथि के पूर्व निश्चित रूप से प्राप्त हो जाना चाहिए तीसरा विभाग अध्यक्ष अथवा राज्य शासन के कार्यालय स्थापना ओं में कार्यरत sarakaaree karmachaari अपने विवरण कार्यालय प्रमुख को प्रस्तुत करेंगे जिससे कि वह संबंधित सचिव विभागाध्यक्ष को निश्चित रूप से निर्धारित तिथि के पूर्व प्राप्त हो जाए इसी प्रकार लगातार इसी संबंध में चल और अचल संपत्तियों के संबंध में पत्र राज्य शासन से समय-समय पर जारी किए जाते रहे हैं और इनके विवरण प्राप्त किए जाते रहे हैं इस प्रकार के संबंध में वर्तमान में शासकीय सेवकों की अचल संपत्ति विवरण कंप्यूटर वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराना शुरू कर दिया गया है 

        अब बात करते हैं निर्णय बिजी की पहला ज्ञात आय स्रोतों के अनुपात में यदि अर्जित जायदाद अधिक हो तो यह अनुमान लगाया जाएगा कि बेईमानी से अवैध अर्जित की गई एक निर्णय हुआ था अहमद हसन बनाम मुख्य आयुक्त मणिपुर के अनुसार शासकीय सेवक को यद्यपि उसे संपत्ति की सूची प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है तो भी बेईमानी से संपत्ति अर्जित करने का उसे अधिकार नहीं है ज्ञात आय के स्रोतों से जब उसके द्वारा अर्जित संपत्ति गैर अनुपातिक है तब वह अभी निर्धारित किया कि किया ही जाएगा कि उसने गंभीर avchar किया

  भारत राम बनाम भारत संघ सन 1967 के एक निर्णय में या प्रतिपादित किया गया कि शासकीय सेवक ने स्वयं के नाम से संपत्ति अर्जित की थी और उसने अधिकृत किया कि संयुक्त परिवार की संपत्ति थी अभी निर्धारित किया गया कि यह माना जाएगा कि सास की सेवा की संपत्ति का वास्तव में स्वामी है और उसे ऐसी संपत्ति के अर्जन हेतु निर्धारित पर अधिकारी को सूचित करना चाहिए था

  अचल संपत्ति का अर्जन तथा विक्रय बेनामी लेनदेन नियम 18 दो तभी लागू होगा जब sarakaaree karmachaari द्वारा संपत्ति का अर्जन या विक्रय बेनामी किया जाए यदि शासकीय सेवा के परिवार का कोई सदस्य वास्तव में स्वामी है तो संपत्ति के विक्रय वर्जन में यह नियम sarakaaree karmachaari पर लागू नहीं होगा इस नियम के अंतर्गत दौरा चरण सिद्ध करने के लिए बेनामी लेनदेन की सभी शर्तों को सिद्ध करना पड़ेगा याची केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में निरीक्षक था उसके विरुद्ध आरोप था कि वर्ष 1975 में श्री बी पी मिश्रा निरीक्षक ने श्री युधिष्ठिर साहू ग्राम पट बंद जिला संभल पुर से 1 एकड़ 28 डिसमिल भूमि रजिस्ट्री इत्यादि सहित रुपए 6570 में अपनी पत्नी के नाम उप रजिस्ट्रार संबलपुर की बीड क्रमांक 780 वर्ष 1975 के अनुसार ग्रह किया इस आरोप पर उसे परिनिंदा की शास्त्रीय ₹3 की गई थी

           इसी आदेश को चुनौती दी गई थी बिराजा प्रसाद मिश्रा नामा बनाम भारत संघ के इस प्रकरण में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण कटक ने अभी निर्धारित किया कि याची के विद्वान काउंसिल द्वारा उठाए गए तर्कों के मूल्यांकन हेतु संबंधित नियम लिखना आवश्यक है जो इस प्रकार है कि जब भी कोई सास की सेवक अपने नाम पर अथवा अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से कोई संपत्ति अर्जित करेगा वह सरकार को आवश्यक जानकारी इसका आंसर था अर्थ है कि जब संपत्ति का अर्जन sarakaaree karmachaari  द्वारा स्वयं किया जाएगा दूसरे शब्दों में जब शासकीय सेवक कोई संपत्ति अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम अर्जित करेगा तो उसे बेनामी लेनदेन शुमार किया जाएगा दोनों पक्षों के विद्वान का उनसे लोगों को सुनने के बाद हमारा मत है कि केवल जब कोई संपत्ति बेनामी अर्जित करेगा केवल तभी शासकीय सेवक का कर्तव्य होगा कि वह सरकार को सूचित करें इसमें विवाद नहीं है कि पत्नी परिवार की सदस्य हैं यह स्वीकार किया गया है कि आरोप में उल्लेखित संपत्ति पत्नी के नाम बताई गई है

            ऐसी परिस्थिति में यह अभियोजन का पक्ष का कर्तव्य है कि वह यह सिद्ध करें यह बेनामी लेनदेन था बेनामी के मामलों में कानून है कि प्रत्येक क्षेत्र अनुमान यह है कि संपत्ति बेनामी के रूप में अर्जित नहीं की गई खंडन कारी परिकल्पना है कि संपत्ति बेनामी नहीं है तथा इसे सिद्ध करने का भारत उस व्यक्ति पर है जो निश्चित पूर्वक बेनामी को सिद्ध करें कि यह बेनामी लेनदेन था अतः न्यायालय का मत था कि इस मामले में स्वीकार किया गया है कि संपत्ति पत्नी के नाम है और याचिका प्रकरण है कि उसकी पत्नी द्वारा अपने स्त्री धन से इसे क्रय किया गया था अतः अभियोजन के लिए आवश्यक है कि वह पूर्णतया सिद्ध करें कि विचाराधीन राशि याची द्वारा दी गई थी तथा यह बेनामी लेनदेन था हमने गंभीरतापूर्वक प्रस्तुत साक्ष्य पर विचार किया और हमने पाया कि ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं है जिससे दोसा के किया जी द्वारा विचाराधीन राशि दी गई थी तथा यह की पत्नी के नाम पर संपत्ति बेनामी अर्जित की गई थी अतः यह निष्कर्ष निकालने के लिए बाद है कि प्रशासन आधीन संपत्ति राशि की स्त्री धन संपत्ति है

      पति पत्नी अथवा सास की सेवा के परिवार की किसी दूसरे सदस्य द्वारा अपने धन स्त्री धन उपहारों से प्राप्त इत्यादि से अपने नाम संपत्ति क्रय की जाए तो नियम 18 दो तथा तीन के प्रावधान लागू नहीं होंगे sarakaaree karmachaari द्वारा सूचित नहीं किया जाएगा

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