sarkaree karmachaariyon ke avachaar ke vishay

सरकारी कर्मचारियों के अवचार के विषय

इस पोस्ट के माध्यम से हम बात करेंगे सरकारी कर्मचारियों के अवचार के विषय में जिसमें हम जानेगें अवचार की परिभाषा जिसे ब्लैक लॉ शब्दकोष के द्वारा परिभाषित किया गया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी

निश्चित तथा सुस्थापित नियम की कार्यवाही का उल्लंघन,
कोई वर्जित कृत्य,
डयूटी से लापरवाही,
गैरकानूनी व्यवहार,
आचरण में हठधर्मी
अनुचित या त्रृटिपूर्ण व्यवहार
अपकर्म दुराचरण
अनुचित व्यवहार,
कुप्रबंध
अपराध के समानार्थ अपराधी हो किन्तु असावधानी या लापरवाही नहीं

     कार्यालय में अवचार को निम्नलिखित रूप से स्पष्ट किया गया है कि अपने कार्यालय की ड्यूटियों के संबंध में किसी लोक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी के द्वारा कोई गैरकानूनी व्यवहार करना, आचरण में हठधर्मी होना तथा ऐसे कार्यों में लिप्त रहना जिसे करने हेतु कार्यालय को अधिकारी न हो, असंगत कार्याें का करना, किसी सकारात्मक ड्यूटी के कृत्य के होते हुए भी कृत्य में असफल होना ये सभी कार्योलयों में अवचार की श्रेणी में आते हैं। इसी प्रकार पी0 रामनाथ अरूयर की लॉ लैक्सिकन में अवचार को निम्नानुसार स्पष्ट किया गया है कि अवचार शब्द में अन्यायपूर्ण आशय अन्तर्निहित हैं तथा निर्णय मात्र की भूल नहीं है। अवचार शब्द एक अनुपातिक शब्द है जिसका अर्थ त्रृटिपूर्ण अथवा अनुचित आचरण है। सामान्य बोली में, अवचार का अर्थ किसी निश्चित तथा सुस्थापित निय की कार्यवाही का उल्लंघन है, आवश्यकता की मांग को छोडकर जहां कोई विवेकाधिकार न हो, तथा असावधानी, लापरवाही आर अदक्षता कुछ सुस्थापित किन्तु निश्चित नियम का उल्लंघन है जहॉं कर्ता पर अनिवार्यतः कुछ विवेकाधिकार छोडा जाता है। निश्चित कानून का उल्लंघन अवचार है किसी अनिश्चित कानून के अंतर्गत विवेकाधिकार का दुरूपयोग या लापरवाही करना वर्जित कृत्य भी अवचार है किसी कृत्य का वर्जित स्वभाव लापरवाही है तथा यह अनिवार्यतः अपरिमित है। किसी लोक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी द्वारा गैरकानूनी व्यवहार या उपेक्षा को जिससे किसी पक्ष का अधिकार प्रभावित होता है कार्यालय में अवचार को परिभाषित किया जा सकता है।

आचार शब्द है यद्यपि परिशुद्ध परिभाषा का समर्थ नहीं है तथापि प्रसंग से इसके मनन पर इसके अनुपालन में कर्तव्य छूती और यह ड्यूटी की प्रकृति तथा अनुशासन को प्रभावित करता है को इंगित करता है चरित्र ही से अंतर ग्रस्त आचरण अनुचित या त्रुटि पूर्ण व्यवहार गैरकानूनी व्यवहार आचरण में हटीला पन वर्जित कृतित्व स्थापित तथा आचरण संहिता या निश्चित नियम की कार्यवाही का उल्लंघन किंतु ड्यूटी के निष्पादन के नियम की कोई भूल लापरवाही या असावधानी नहीं है

सत्य निष्ठा सच्चाई ईमानदारी और शुद्धता है शासकीय सेवकों में सत्य निष्ठा सुनिश्चित करने के लिए शासन ने शासकीय सेवक के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन में सत्य निष्ठा का प्रमाण पत्र प्रचलित किया है यदि किसी शासकीय सेवा का रहन सहन उसके साधनों से ऊंचे स्तर का है और वह अपने आय के स्त्रोतों को स्पष्ट कर वरिष्ठ अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर सकता तो उसे बेईमान की प्रक्रियाओं में लिप्त माना जा सकता है प्रत्येक कर्मचारी ना केवल ईमानदार हो बल्कि ईमानदार दिखना भी चाहिए अतः अधिकारी और उसके अधीनस्थों के बीच आपस में ऐसे सामाजिक संबंध रखें कि कोई अधीनस्थ या उनका समूह यह न सोचे कि इन पर अधिकारी की विशेष कृपा है

कर्तव्य परायणता का अर्थ निष्ठावान सेवा है केवल कार्यालय के परिसर में रहना पर्याप्त नहीं है शासकीय सेवक यदि निर्दिष्ट स्थान से अनुपस्थित है तो कदाचार में लिप्त रहना माना जाएगा कार्यालय देर से आना समय पूर्व जाना ड्यूटी में सोना बिना अनुमति के अनाधिकृत अनुपस्थित रहना ड्यूटी से कर्तव्य परायणता नहीं है जहां राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित मामलों में मुख्य सचिव द्वारा पुलिस महा निरीक्षक तथा राजस्व बोर्ड की बैठक में उपस्थित होने से किसी अधिकारी द्वारा इनकार किया जाए वहां कर्तव्य के घोर त्याग तथा मुख्य सचिव के साथ अशिष्ट व्यवहार हेतु आरोपित किया जाएगा

अशोभनीय आचरण और श्रीनिवास बनाम भारत संघ मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि आचरण नियमों में कोई सा आचरण शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय है परिभाषित नहीं किया गया है वेबस्टर्स इंटरनेशनल डिक्शनरी के अनुसार शब्द अशोभनीय का अर्थ अनुपयुक्त अभद्र अनुचित है इस शब्द का साधारण शब्दकोश में अर्थ है ऐसा आचरण जो लज्जा इस पद निंदनीय या घृणास्पद है अब बात करते हैं और avchaar or क्या है अनुशासनिक कार्यवाही ओं जिसमें स्वास्थ्य द्रोपित की जाए के संबंध में अवश्य निश्चय करने के संबंध में भारत संघ तथा अन्य बनाम से अहमद के मामले में यह मत व्यक्त किया गया है कि आचरण नियमों में दिया गया आचरण का संहिता स्पष्ट तक बताता है कि सेवा के सदस्यों में कैसे आचरण की अपेक्षा है आचरण नियमों के संदर्भ में शासकीय सेवकों का ऐसा आचरण जो निंदनीय हो दूर आचरण हो सकता है यदि कोई सेवक अपनी ड्यूटी का निर्माण हेतु उचित निष्ठावान की हीनता से करता है तो वह दूर आचरण होगा सेवा की आवश्यकता शर्तों की अवज्ञा द्वारा चरण होगा यह दृष्टिकोण शारदा प्रसाद ओंकार प्रसाद बनाम डिविजनल सुपरिटेंडेंट सेंट्रल रेलवे नागपुर में अपनाया गया है उच्च न्यायालय ने डिक्शनरी में दुर्गा चरण की भाषा का उल्लेख किया था अर्थात बुरे उद्देश्य से उत्पन्न दूर आचरण है किंतु असावधानी के कृत्य निर्णय की त्रुटियां अबोध गलती ऐसा तोड़ा चरण सन स्थापित नहीं करती या विश्वास करना कठिन है कि कार्यकुशलता या ड्यूटी के निर्वहन में उच्चतम मानदंड प्राप्ति की कमी सतह दुर्गाचरण स्थापित करता है कर्तव्य के निर्वहन में उच्चतम मापदंड की कार्य कुशलता प्राप्त करने की असफलता से असावधानी का अनुमान आचरण नियमों के नियम 3 के उद्देश्य के लिए दौरा चरण संस्थापक नहीं होगा तथा कर्तव्य परायणता में कमी नहीं कहा जाएगा

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